16 दिसंबर की रात देश की राजधानी दिल्ली में हुई दरिंदगी की घटना ने ना सिर्फ देशभर को झकझोर कर रख दिया था बल्कि इंसानियत को तार तार कर देने वाली इस घटना ने दुनिया भर में देश का सिर शर्म से झुकने पर मजबूर कर दिया था। इस घटना को बीते करीब 125 दिन बीत चुके हैं, घटना के बाद सड़क से लेकर संसद तक ये घटना ज़बरदस्त तरीके से गूंजती रही। सरकार के संत्री से लेकर मंत्री तक सबने बड़ी-बड़ी बातें की लेकिन नतीजा आज भी नील बटे सन्नाटा है। कैसे आइये आपको बताते हैं…
1- 16 दिसंबर की घटना को काले शीशे वाली बस में अंजाम दिया गया था जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश थे कि देशभर में काले शीशे वाले वाहनों के शीशों पर चढ़ी फिल्म उतारी जाए लेकिन आज भी आप अपने आस पास ऐसे वाहनों को सड़क पर सरपट दौड़ते देख सकते हैं जिनके शीशे काले हों।
2- 16 दिसंबर के बाद दिल्ली के एलजी तेजिंदर खन्ना, दिल्ली पुलिस एवं तमाम गैर सरकारी संगठनों की मैराथन बैठकें हुईं। बैठकों में बार-बार ये बात कही गई डीटीसी की बसों में रात के वक्त दिल्ली पुलिस का एक कॉस्टेबल मौजूद रहेगा लेकिन ये बात भी हवा हवाई साबित हुई आज तक इस तरह की कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
3- 16 दिसंबर की वारदात के बाद दिल्ली सरकार एवं गृह मंत्रालय की तरफ से वायदा किया गया था कि दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा को देखते हुए बहुत जल्द रात के वक्त पब्लिक ट्रांसपोर्ट की संख्या बढ़ाई जाएगी लेकिन शीला और शिंदे का ये वादा भी अब तक अमलीजामा नहीं पहन पाया है।
4- 16 दिसंबर की हैवानियत के बाद दिल्ली पुलिस कमिश्नर एवं गृह मंत्रालय ने वादा किया था कि पुलिस के रवैये में बदलाव आएगा….लेकिन 125 दिन बाद इस तरह की घटनाओं के लिए पुलिस का रवैया इस कदर बदल गया है कि वो रेप पीड़ित बच्ची के पिता को 2000 रुपये रिश्वत देकर चुप रहने की हिदायत देती है।
5- 16 दिसंबर के बाद गृह मंत्रालय ने वादा किया था कि बसों के रुट पर जीपीएस सिस्टम लगाए जाएंगे जिससे बसों की लोकेशन लगातार ट्रैक की जा सके लेकिन आज भी स्थिति जस की तस है।
6- 16 दिसंबर के बाद यानी 125 दिन पहले गृह मंत्रालय ने वायदा किया था कि दिल्ली में पुलिस पैट्रोलिंग बढ़ाई जाएगी लेकिन दिल्ली में इस कदर पैट्रोलिंग बढ़ाई गई कि जब एफआईआर कराने गुड़िया का पिता थाने पहुंचा तो ना तो उसकी एफआईआर दर्ज की गई और ना ही किसी पुलिसवाले ने उसके साथ जाकर गुड़िया को तलाशने की जहमत उठाई।
सवाल ये है कि आखिर नींद की गोलियां खाकर सो रही हमारी सरकार और हमारा सिस्टम कब जागेगा…हालात बदलने के लिए 125 दिनों का वक्त बहुत होता है लेकिन सिर्फ़ और सिर्फ़ कमज़ोर इच्छा शक्ति के चलते 125 दिन तो क्या 125 महानों और सालों का वक्त भी नाकाफ़ी साबित हो सकता है ज़रुरत है मज़बूत इच्छा शक्ति की जो शायद हमारी सरकार के पास नहीं है इसिलिए तो एक के बाद एक लगातार हो रही बलात्कार जैसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई कड़ा कानून नहीं बन पाया है । सवाल ये है कि आखिर सरकार को कड़ा कानून बनाने में आपत्ति क्या है आखिर क्यों सरकार नहीं
चाहती कि बलात्कार के आरोपी को फांसी की सज़ा दी जाए…कहीं सरकार ये सोचकर तो नहीं सहम जा रही है कि अगर कभी सरकार के किसी मंत्री या बड़े अफसर पर बलात्कार का आरोप लगा तो अपने ही बनाये कानून की सज़ा खुद के मंत्री या अफसर को देनी पड़ेगी । सवाल लाख टके का है और शायद जवाब भी यही है, नहीं तो जिस देश के कई शीर्ष पदों पर महिलाएं विराजमान हो उस देश में महिला सुरक्षा भगवान भरोसे है।
लेखक शगुन त्यागी सहारा, चैनल वन, नॉर्थ ईस्ट बिज़नेस रिपोर्टर समेत कई संस्थानों को अपनी सेवाएं दे चुके हैं. मायावती की मूर्ति तोड़कर चर्चा में आने वाले शगुन 'राजद्रोह' नाम से एक किताब भी लिख रहे हैं. इन दिनों वे सपा से जुड़े हुए हैं. शगुन से संपर्क उनके मोबाईल नंबर 07838246333 पर किया जा सकता है.






