: एडिटोरियल में जूनियर लेबल पर छंटनी की चर्चाएं : मजीठिया वेतन आयोग की सिफारिशों को देखते हुए खबर है कि अमर उजाला ने अपनी नीतियों में परिवर्तन किया है. नई नीति के तहत आने वाले दिनों में इसके यूनिटों में छंटनी अभियान चलाया जा सकता है. प्रबंधन अब ऐसे लोगों को प्राथमिकता दे रहा है, जो कंटेंट के साथ कम्प्यूटर की भी अच्छी जानकारी रखते हों. सूत्रों का कहना है कि अमर उजाला ने अब ट्रेनी या जूनियर सब एडिटर रखने की बजाय ट्रेनी कम्प्यूटर ऑपरेटर रखने की नीतियों पर जोर दे रहा है.
सूत्र बताते हैं कि पिछले कुछ दिनों में अमर उजाला प्रबंधन ने सभी यूनिटों से रिक्वायरमेंट मंगाकर अस्सी से ज्यादा ट्रेनी कम्प्यूटर ऑपरेटरों की भर्ती की है. हालांकि अमर उजाला ही ऐसा अखबार है जिसने अपने यूनिटों में थोड़ा या ज्यादा बछावत और मणिसाना आयोग को लागू किया है. संभावना जताई जा रही है कि आंशिक तौर पर ही सही अमर उजाला प्रबंधन मजीठिया आयोग को भी लागू कर सकता है. प्रबंधन ने इसके संकेत भी दिए हैं. पर इसके साथ प्रबंधन नए खर्चों की कटौती पर ध्यान देते हुए ट्रेनी के रूप में काम कर रहे पत्रकारों को परमानेंट करने की योजना को ठंडे बस्ते में डालने की रणनीति बनाई है.
हालांकि अखबार के वरिष्ठ लोगों बातचीत में ऐसी किसी नीति या संभावना से इनकार किया फिर भी अंदरखाने ऐसी चर्चा जोरों पर है. वरिष्ठों ने कहा कि जिन कम्प्यूटर ऑपरेटरों की भर्ती की गई है यह किसी छंटनी नीति के तहत नहीं बल्कि जिन यूनिटों में जरूरत थी, उसके अनुसार की गई है. अस्सी से नब्बे के बीच में भर्तियां हुई हैं. अखबार को छंटनी करने की जरूरत नहीं है. रही बात मजीठिया आयोग की तो इस पर अभी सुप्रीम कोर्ट का फैसला आना है. इसके बाद ही किसी भी अखबार का प्रबंधन कोई निर्णय लेगा.





