साल 2011-12 के दौरान आठ देसी-विदेशी चैनलों को केबल टेलीविजन नेटवर्क्स रेगुलेशन एक्ट के अंतर्गत प्रोग्रामिंग एवं विज्ञापन कोड के उल्लंघन का दोषी पाया गया है. सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने इसके खिलाफ कड़ा कदम उठाने का निर्णय लिया है. इन सभी चैनलों को नोटिस भेजा गया है. संसद में इसकी जानकारी देते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्वतंत्र प्रभार मनीष तिवारी ने बताया कि इस एक्ट में प्रोग्रामिंग और विज्ञापन पर प्री सेंसरशिप नहीं है, इसके बावजूद दोषी पाए गए चैनलों के खिलाफा कठोर कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया है.
उल्लेखनीय है कि ऐसी ही शिकायतें मिलने के बाद एफटीवी के प्रसारण को इस साल 28 मार्च से दस दिनों के लिए बंद किया गया था, जबकि एएक्सएन के प्रसारण को एक दिन के लिए बंद करने का ओदश दिया गया. अन्य चैनलों जैसे सोनी पिक्स, सोनी, टीएलसी और ज़ी ट्रेंडस को सलाह औऱ चेतावनी देकर छोड़ दिया गया. इन कार्रवाईयों के दौरान सोनी इंटरटेनमेंट टेलीविजन ने एडल्ट फिल्म के प्रोमो की बगैर इजाजत प्रसारण के लिए माफी मांग ली, जिसके बाद उसका मामला खत्म कर दिया गया.
वहीं दूसरी तरफ टीसीएम टीवी को बगैर सेंसरशिप की इजाजत के एडल्ट फिल्म दिखाने का मामला अभी विचाराधीन है. स्टार क्रिकेट को लिकर ब्रांड के एड प्रसारण का मामला भी लंबित चल रहा है. निजी चैनलों के कंटेंट की निगरानी के लिए एक इलेक्ट्रानिक मीडिया मॉनिटरिंग सेंटर की स्थापना की गई है. इन चीजों पर नजर रखने के लिए अंतर मंत्रालयी समिति का गठन भी किया गया है. भारतीय प्रेस परिषद ने प्रिंट मीडिया के लिए पत्रकारिता आचार मापदंड का गठन किया है. परिषद प्रिंट मीडिया में जहां कहीं भी कंटेंट में गलती पाई जाती है या उल्लंघन किया जाता है, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करता है.





