मंगलवार को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने आम सूचना साधनों के उन मालिकों और कर्मियों की सूची जारी की, जिनको प्रशासन के प्रति निष्ठा के लिये सूचना मंत्रालय के गोपनीय कोष से पैसे मिलते थे। इस सूची में प्रभावशाली अंग्रेज़ी भाषी और उर्दू भाषी पत्र-पत्रिकाओं के जाने-माने प्रकाशक और पत्रकार शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट के अनुसार उनको सन् 2002 से लेकर अब तक सरकार को मंज़ूर लेखों के प्रकाशन के लिये करीब 18 करोड़ रुपये मिले। इस के अलावा सुप्रीम कोर्ट ने सूचना दी कि कुछ पत्रकारों को सूचना मंत्रालय से नियमित रूप से कीमती चीज़ें उपहारस्वरूप मिलती थीं। इस से पहले सूचना मंत्रालय ने प्रकाशकों और पत्रकारों को गोपनीय कोष से पैसे दिये जाने की सभी सूचनाओं का खंडन किया था।






