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भड़ास ने परेशानियों के बावजूद पांच सालों में मीडिया को सच का सामना कराया है

मीड़िया को सच का सामना कराने पर मजबूर करने का काम जो भड़ास मीडिया ने पांच सालों में किया वह लगभग मील का पत्थर है। औकात में रखने के लिए लोगों ने यशवंत जी को परेशान भी किया किन्तु इंसान वही है जो तूफाँ का रूख मोड़ दे। सच है कि जब सियासतदार, और रियासतदार दोनों मिल जायें तो उस आँधी का क्या कहना, परन्तु वाह रे ईमान जो डिगा नहीं, और सबकी बातें लेकर चलता रहा। भले ही तमाम तूफानों ने इन्हें घेरे रखा।

मीड़िया को सच का सामना कराने पर मजबूर करने का काम जो भड़ास मीडिया ने पांच सालों में किया वह लगभग मील का पत्थर है। औकात में रखने के लिए लोगों ने यशवंत जी को परेशान भी किया किन्तु इंसान वही है जो तूफाँ का रूख मोड़ दे। सच है कि जब सियासतदार, और रियासतदार दोनों मिल जायें तो उस आँधी का क्या कहना, परन्तु वाह रे ईमान जो डिगा नहीं, और सबकी बातें लेकर चलता रहा। भले ही तमाम तूफानों ने इन्हें घेरे रखा।

विडम्बना यह रही जिस तरह से क्षिति, जल, पावक, गगन और समीर इन पंचतत्वों से यह अधम शरीर बना होने के बावजूद उन तत्वों ने भी समय को अपने हिसाब से चलाने वालों के घमण्ड का साथ दिया, परिणामस्वरूप जमीनी हकीकत (क्षिति), को जानते हुए भी यशवंत के पानी (जल) को उतारने का असफल प्रयास किया गया। परन्तु आग (पावक) से तपकर जैसे सोना और भी चमकना शुरू कर देता है, उसी तरह से हर बार भड़ास और भी अधिक उभर कर सामने आया। शून्य सा आकाश (गगन) से विवाद उठाने वालों ने भड़ास को कहीं का नहीं छोड़ा और इन्हीं नाजायज हवाओं (समीर) के माध्यम से उन्हें जेल भेजने का भी प्रबन्ध कर दिया, फलस्वरूप इन्हें जेल में भी रहना पड़ा।

सच है! सच का कोई सामना कर ही नहीं सकता। अगर किसी ने प्रयास भी किया तो वह यथा मिट सा गया या मिटा दिया गया। यशवंत जी भड़ास के पांच साल पूरे होने पर आपको शत-शत बधाइयाँ आप यूँ ही पुरजोर समर्थन के साथ जरूरतमंदों की जरूरत बने रहें। क्योंकि कमजोर इंसान का कोई अगुआ नहीं होता। परन्तु इन कमजोरों की जबान बन कर भड़ास के माध्यम से जो काम आपने किया है, वह काबिले दाद है। धन्यवाद्!

सम्‍पूर्णानंद दुबे

मऊ

[email protected]

भड़ास ने छोटे जिलों के पत्रकारों को आवाज दी है

भड़ास के ५ साल  होने के अवसर पर भड़ास के सभी अधिकारियों को हार्दिक बधाई… अगर भड़ास न होता तो आज हम जैसे छोटे जिलों के पत्रकारों की आवाज दबकर रह जाती… भड़ास एक ऐसा मंच है जो हमें आजादी देती है अपनी बातें कहने और रखने की… भड़ास के बारे में जितना लिखूं या कहूं वो कम ही होगा… भगवान् से प्रार्थना होगी कि भड़ास दिनरात आगे बढ़ता रहे और भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी हर लोग यह जाने की भड़ास क्या है… ज्यादा क्या लिखूं.. अंत में एक बार फिर… जय हिन्द जय भारत के साथ…जय भड़ास.

धीरज पांडेय

पत्रकार

औरंगाबाद

बिहार


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