छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार एवं तहलका से जुड़े राजकुमार सोनी की याचिका पर हाईकोर्ट ने राज्य शासन और एक अन्य पत्रकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। पत्रकार द्वारा उनके दो लेखों पर आपत्ति दर्ज कराते हुए 2011 में साइबर सेल में मामला दर्ज कराया गया था। फिलहाल मामला सीजेएम कोर्ट में लंबित है। एफआईआर को निरस्त कराने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका लगाई गई है।
वर्तमान में तहलका के छत्तीसगढ़ प्रमुख राजकुमार सोनी ने 15 जनवरी 2011 को ‘छत्तीसगढ़ चैनल पुराण’ और 21 मार्च 2011 को ‘प्रियंका का शहर छोड़कर जाना’ शीर्षक से दो लेख लिखे थे। दोनों लेखों के कुछ हिस्सों पर एक अन्य पत्रकार प्रफुल्ल पारे ने आपत्ति दर्ज कराते हुए रायपुर के साइबर सेल में मामला दर्ज कराया था। पुलिस ने राजकुमार के खिलाफ आईटी एक्ट समेत कई धाराओं में मामला दर्ज कर लिया था, जबकि अगर किसी को लेख पर आपत्ति थी तो मानहानि का मामला दर्ज किया जाना चाहिए था। पुलिस ने आईटी एक्ट की धारा 66 ए के तहत मामला दर्ज करने के साथ ही चार्जशीट पेश किया था। फिलहाल मामला सीजेएम की अदालत में लंबित है।
राजकुमार सोनी ने एफआईआर के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। इसमें एफआईआर, इसपर उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला और चार्जशीट रद्द करने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि यह संविधान से मिले अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का हनन है। गुरुवार को जस्टिस आरएस शर्मा की सिंगल बेंच में सुनवाई हुई। प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राज्य शासन और प्रफुल्ल पारे को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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