चम्पादक जी, नई महिला एंकर के अपनी ओर मुड़ कर भी न देखने से मन ही मन कुंठा से भरते जा रहे थे…सोच रहे थे कि जब इंटरव्यू किया था, तब तो बड़ा हंस हंस कर बात कर रही थी…फोन भी बिल्कुल सेड्यूस करने वाली स्टाइल में बात करती थी…क्या चक्कर है…लगता है समझाना पड़ेगा कि अपन चम्पादक हैं…
सिर खुजाते-खुजाते अचानक आईडिया चमका…डेस्क पर गए, शाउटपुट हेड से बोले, "सुनो ऐसा है, मेरा मानना है कि एक अच्छे एंकर को डेस्क का काम आना चाहिए…अपने एंकर लिंक्स खुद लिखने चाहिए…औऱ दिन में 3-4 पैकेज भी लिखने चाहिए…"
शाउटपुट हेड – जी सर…सही है बिल्कुल, मैं तो हमेशा कहता हूं…
चम्पादक – हां…तो ऐसा है जो नई एंकर आई है, उसे कम से कम एक हफ्ता पहले डेस्क पर बिठाओ…यहां का काम समझ ले, उसके बाद ऑन एयर करेंगे…
शाउटपुट हेड – लेकिन सर उसकी तो शिफ्ट लगी है…बुलेटिन है…
चम्पादक – तो बुलेटिन कोई और कर लेगा…
शाउटपुट हेड – सर…
चम्पादक – क्या हुआ…कोई कन्फ्यूज़न है क्या…मैं फिर से बताऊं…
शाउटपुट हेड – नो सर…समझ गया…
(चम्पादक मुस्कुराए और धूर्तता भरी आंखों से डेस्क पर खड़ी एक और महिला एंकर की ओर देख कर बोले..) "भई, हमको कोई किसी से दुश्मनी तो है नहीं…जो कर रहे हैं, आप लोगों और चैनल के भले के लिए ही कर रहे हैं…क्यों"
चम्पादक सीरीज के जनक हैं पत्रकार, राइटर और एक्टिविस्ट मयंक सक्सेना जो कई चैनलों में कई संपादकों के साथ काम कर चुके हैं. इन दिनों समाचार प्लस के साथ जुड़े हुए हैं. चम्पादक सीरीज की अन्य ब्रेकिंग कथाएं-रचनाएं पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें- चम्पादक





