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रंगरेलिया मना रहे हिंदुस्‍तान के पत्रकार को नागरिकों ने पीटा, नाली में डाला

कुछ पत्रकारों की हरकत पूरे समूह को शर्मसार कर देती है, ऐसा ही एक वाकया लगभग एक सप्‍ताह पहले देवरिया जिले के बरहज में हुआ है. हिंदुस्‍तान अखबार के क्षेत्रीय पत्रकार संतोष उपाध्‍याय को रंगरेलिया मनाना भारी पड़ गया. स्‍थानीय लोगों ने उन्‍हें जमकर मारने पीटने के बाद नाली में डूबोया, चेहरे पर गंदगी तक मल दी. सूचना पर पहुंची पुलिस ने उन्‍हें लोगों के चंगुल से बाहर निकाला. इस घटना के बाद से हिंदुस्‍तान की जमकर थू-थू हो रही है. 

कुछ पत्रकारों की हरकत पूरे समूह को शर्मसार कर देती है, ऐसा ही एक वाकया लगभग एक सप्‍ताह पहले देवरिया जिले के बरहज में हुआ है. हिंदुस्‍तान अखबार के क्षेत्रीय पत्रकार संतोष उपाध्‍याय को रंगरेलिया मनाना भारी पड़ गया. स्‍थानीय लोगों ने उन्‍हें जमकर मारने पीटने के बाद नाली में डूबोया, चेहरे पर गंदगी तक मल दी. सूचना पर पहुंची पुलिस ने उन्‍हें लोगों के चंगुल से बाहर निकाला. इस घटना के बाद से हिंदुस्‍तान की जमकर थू-थू हो रही है. 

जानकारी के अनुसार हिंदुस्‍तान के लिए बरहज में काम करने वाले पत्रकार संतोष उपाध्‍याय का बरहज के जयनगर मुहल्‍ले में स्थित सोनकर ब‍स्‍ती के एक महिला से चक्‍कर चल रहा है. संतोष अक्‍सर उसके घर आया जाया करते थे. दो सालों से यह क्रम चल रहा था. कई बार स्‍थानीय लोगों ने उनको ऐसी हरकत करने से रोक था, परन्‍तु पत्रकार होने के रौब में संतोष सबको हड़का देते थे. बीते 19 अप्रैल की रात एक बार फिर रंगरेलिया मनाने सं‍तोष अपनी महिला मित्र के घर पहुंचे.

मुहल्‍ले की बदनामी से नाराज स्‍थानीय लोग भी संतोष के भीतर जाने के बाद महिला के घर के सामने इकट्ठे हो गए. संतोष को महिला के साथ आपत्तिजनक हालत में देखकर स्‍थानीय लोगों ने आपा खो दिया तथा उनकी जमकर पिटाई की गई. इतना ही नहीं उन्‍हें नाली में भी गिराकर मारा गया. किसी ने एक पत्रकार को पीटे जाने की सूचना पुलिस को दी. मौके पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह आक्रोशित भीड़ के हाथों पीट रहे संतोष को बचाकर बाहर निकाला. इसके बाद से ही बरहज में पत्रकार शर्मसार हैं.

हालांकि इस संबंध में संतोष उपाध्‍याय का कहना है कि उन्‍हें गलत तरीके से बदनाम किया जा रहा है. दो पट्टीदारों की लड़ाई के बीच वे फंस गए हैं. वे एक परिवार को पैसे देने गए थे तो दूसरे परिवार ने कुछ लोगों के उकसाने पर उनके साथ मारपीट की. रंगरेलियां जैसे आरोप बिल्‍कुल गलत और निराधार हैं.

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