मेरे एक मित्र हैं उर्मिलेश। मैं उन्हें १९८३-८४ से जानता हूं। धीर गंभीर पत्रकारों मे उनकी गिनती होती है। उर्मिलेश का कहना है कि हिंदी पत्रकारिता में दलित और पिछड़ी जाति के लोगों पर अघोषित रोक सी लगी है। आप किसी भी मीडिया हाउस के टॉप टेन लोगों में दलित और पिछड़ी जाति के लोगों के नाम नहीं बता पाएंगे। पर मुझे लगता है कि मीडिया हाउसेज के टॉप टेन में ब्राह्मण और कायस्थ के अलावा अन्य अगड़ी जाति के लोग भी नहीं के बराबर हैं।
वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ल के एफबी वॉल से साभार.





