इलाहाबाद हाई कोर्ट, लखनऊ बेंच ने आरटीआई कार्यकर्ता डॉ. नूतन ठाकुर द्वारा दायर रिट याचिका में राज्य सूचना आयोग में सूचना आयुक्त पद पर उन्हें नियुक्त करने सम्बंधित प्रत्यावेदन पर नियमानुसार निर्णय लेने के आदेश पारित किये हैं. जस्टिस उमा नाथ सिंह और जस्टिस महेंद्र दयाल की बेंच ने प्रमुख सचिव, प्रशासनिक सुधार विभाग और प्रमुख सचिव, मुख्यमंत्री को आदेशित किया कि इस सम्बन्ध में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की परिधि में उचित निर्णय लिया जाये.
लखनऊ स्थित आरटीआई कार्यकर्ता उर्वशी शर्मा ने 09 अप्रैल 2012 के अपने प्रत्यावेदन द्वारा अखिलेश यादव, मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश से अनुरोध किया था कि राजनैतिक पहुँच वालों के स्थान पर वास्तविक रूप से सक्रिय और जानकार आरटीआई कार्यकर्ताओं को ही सूचना आयुक्त के पद पर तैनात किया जाए. उन्होंने एक ऐसे नाम के रूप में नूतन का बायोडाटा प्रस्तुत किया था.
नूतन ने 24 जनवरी 2013 के प्रत्यावेदन के माध्यम से राज्य सरकार से निवेदन किया था कि सूचना आयुक्तों की नियुक्ति में पारदर्शिता बरती जाए, इसके लिए सभी इच्छुक अभ्यर्थियों से आवेदन प्राप्त कर पारदर्शी तौर-तरीके से उनकी नियुक्ति की जाए. वर्तमान में उत्तर प्रदेश में सूचना आयुक्तों के आठ पद खाली हैं जिन पर शीघ्र नियुक्ति होना संभावित है.





