दैनिक जागरण, पानीपत से संजय झा बहुत खुशी खुशी पटना गए. उनका ट्रांसफर हो गया था. जागरण की एचआर एडिटोरियल पालिसी के तहत उनका तबादला हुआ. उन्होंने बच्चों का नाम स्कूल से कटवाया. सामान समेटा. पूरे परिवार के साथ पटना पहुंच गए. पर दैनिक जागरण, पटना में उनकी मुश्किलें शुरू हो गईं. उन्हें तरह तरह से प्रताड़ित परेशान किया जाने लगा.
निशिकांत ठाकुर का खास आदमी होने का पूरा बदला पटना यूनिट वालों ने संजय झा से लिया. संजय झा को समझ में आना बंद हो गया कि वे करें तो क्या करें. वे दिल्ली आए. अपने आका निशिकांत ठाकुर से मिले. निशिकांत ठाकुर ने उन्हें फिर से पानीपत में जमा दिया है. मतलब कि लौट के संजय झा पानीपत आए. पचास साल से ज्यादा उम्र वाले संजय झा दैनिक जागरण में सीनियर सब एडिटर हैं.
पानीपत से पटना और पटना से पानीपत करने में संजय झा की हवा खराब हो गई है. पैसा रुपया स्कूल फीस किराया…. इस सबको मिला दें तो संजय झा की गृहस्थी की गाड़ी इन दिनों गड़बड़ा गई है. अभी उनके बच्चे और पत्नी पटना में हैं. उन लोगों को फिर से पानीपत लाकर जमाना पड़ेगा. स्कूल में नाम लिखाना पड़ेगा. संजय झा अब उस घड़ी को कोस रहे हैं जब उन्होंने पटना जाकर अपने बिहार के करीब रहने का सुख प्राप्त करने का तय किया और तबादले के लिए हामी भर दी.





