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पत्रकारिता में पेड न्यूज का चलन बेहद शर्मनाक है : अच्‍युतानंद मिश्र

: उपजा ने मनाया मई दिवस : लखनऊ। पत्रकारिता कोई अखबार निकालना नहीं है। इसके लिए वैचारिक प्रतिबद्धता की जरूरत है। वर्तमान में मूल्यों का भारी संकट है और वैचारिक प्रतिबद्धता में कमी आई है और अगर सिद्धांत नहीं रहेंगे तो वैचारिक प्रतिबद्धता नहीं रहेगी। सौ करोड़ ज्यादा लोगों का भरोसा लोकतंत्र के चारों खंभों पर टिका है, इसमें मीडिया की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है, 100 करोड़ से ज्यादा लोगों की ताकत और आवाज मीडिया है। प्रदेश के कारागार एवं खाद्य रसद मंत्री राजेन्द्र चौधरी बतौर मुख्य अतिथि अंतरराष्ट्रीय श्रम दिवस के असवर पर उप्र जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन (उपजा) एवं लखनऊ जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन (एलजेए) के संयुक्त तत्वावधान में राय उमा नाथ बली प्रेक्षागृह में आयोजित मई दिवस कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे।

: उपजा ने मनाया मई दिवस : लखनऊ। पत्रकारिता कोई अखबार निकालना नहीं है। इसके लिए वैचारिक प्रतिबद्धता की जरूरत है। वर्तमान में मूल्यों का भारी संकट है और वैचारिक प्रतिबद्धता में कमी आई है और अगर सिद्धांत नहीं रहेंगे तो वैचारिक प्रतिबद्धता नहीं रहेगी। सौ करोड़ ज्यादा लोगों का भरोसा लोकतंत्र के चारों खंभों पर टिका है, इसमें मीडिया की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है, 100 करोड़ से ज्यादा लोगों की ताकत और आवाज मीडिया है। प्रदेश के कारागार एवं खाद्य रसद मंत्री राजेन्द्र चौधरी बतौर मुख्य अतिथि अंतरराष्ट्रीय श्रम दिवस के असवर पर उप्र जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन (उपजा) एवं लखनऊ जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन (एलजेए) के संयुक्त तत्वावधान में राय उमा नाथ बली प्रेक्षागृह में आयोजित मई दिवस कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे।

श्री चौधरी ने कहा कि पिछले 65 वर्षों में वैचारिक हमले हुये हैं जब तक हम पूरी तरह धर्मनिरपेक्ष एवं समाजवादी नहीं हो जाते तब तक लोकतंत्र को मजबूत नहीं किया जा सकता। डॉ. लोहिया ने कहा था कि बिना व्यवस्था बदले हम न्याय नहीं कर सकते। मूल्यों में बड़ी तेजी से गिरावट आ रही है, लेकिन मूल्यों में गिरावट कोई एक दिन में नहीं आई है यह व्यवस्था का हिस्सा बन चुकी है। वर्तमान में पत्रकारिता के सामने भी घोर संकट खड़ा है। लोकतंत्र के चारों खंभों में पत्रकारों की भूमिका बेहद अहम हैं, क्योंकि जो आप लिखते हैं वो शासक को संकेत करती है कि समाज और सत्ता किस दिशा में बढ़ रही है। पत्रकारिता का अतीत समृद्ध है और पत्रकार अगर वैचारिक प्रतिबद्धता के साथ है तो वो टूट नहीं सकता। समाजवादी पार्टी की सरकार ने हमेशा पत्रकारों की परेशानियों को समझा है और आगे भी जो परेशानियों होंगी उन्हें दूर करने का प्रयास किया जाएगा।

उपजा के संस्थापक अध्यक्ष अच्युता नन्द मिश्र ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि मई दिवस आत्म चिंतन का दिन है। भारत में मई दिवस संघर्ष दिवस के रूप में मनाया जाता है। आज पत्रकारिता के समक्ष कई संकट है। गुलामी के दिनों ने अंग्रेजी हकूमत ने अखबारों का गला घोंटने के लिये कई कानून बनाये थे लेकिन उस वक्त का पत्रकार क्रांतिकारी होता था और पत्रकारों ने सिद्धांतों के साथ कभी समझौता नहीं किया। आजादी के बाद पत्रकारिता राह भटक गई और वो प्रभावी नहीं रह गयी। वर्तमान में सत्ता को प्रभावित करने के लिए पत्रकारिता कई हथकंडे अपना रही है। पत्रकारिता अपने सिद्धांत से क्यों टल गई यह चिंतन का विषय है। पत्रकारिता में पेड न्यूज का चलन बेहद शर्मनाक है। शिकायतें सबसे हैं लेकिन जरूरत आत्ममंथन की है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुये राजकिशोर मिश्र, राज्यमंत्री/अध्यक्ष, भारतेन्दु नाट्य अकादमी ने श्रम दिवस की बधाई और शुभकामनाएं दी और सकारात्मक एंव समाज निर्माण की दिशा में प्रभावी भूमिका निभाने का आह्वान किया। वरिष्ठ पत्रकार एवं पीटीआई के ब्यूरो चीफ प्रमोद गोस्वामी ने कहा कि बाजारवादी ताकतों के प्रभावी होने से पत्रकारों के अधिकारों का हनन बढ़ा है और उनकी दुर्गति हो रही है। मालिकों के दुष्प्रवृत्ति के कारण पत्रकारों के लिए वेज बोर्ड का गठन नहीं हो पाया है। केन्द्र सरकार सातवां वेतन आयोग लाने वाली और पत्रकारों की भलाई के लिए कोई ठोस पहल केन्द्र और राज्य सरकारें नहीं कर रही हैं। पत्रकार और पत्रकारिता के सामाजिक सरोकारों के साथ उनकी अपनी चिंताएं और मजबूरियां भी हैं लेकिन पत्रकारों की अगली पीढ़ी से अनुरोध है कि वो लोकतंत्र के चौथे खंभे की मान मर्यादा का सम्मान रखेंगे और इस परंपरा को आगे बढ़ाने का कार्य करेंगे।

उप्र जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन (उपजा) के अध्यक्ष रतन कुमार दीक्षित ने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि पत्रकारिता सत्ता की चेरी न बनें और आवश्यक अधिकार पत्रकारों को मिलें। श्री दीक्षित ने उपजा के गौरवपूर्ण इतिहास और पत्रकारिता की वर्तमान चुनौतियों का उल्लेख किया। उन्होंने पीजीआई में पत्रकारों को निःशुल्क चिकित्सा उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। अतिथियों का अभार व्यक्त करते हुये वरिष्ठ पत्रकार दादा पीके राय ने कहा कि सत्ता और पत्रकारिता के बीच लव एण्ड हेट (प्यार एवं नफरत) का रिशता है, दोनों साथ मिलकर समाज और देश को सकारात्मक दशा और दिशा दे सकते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की वर्तमान चुनौतियों और पत्रकारों की परेशानियों पर भी प्रकाश डाला।

कार्यक्रम का शुभांरभ दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना से हुआ। इस अवसर पर उपजा के संस्थापक सदस्य वरिष्ठ पत्रकार अच्युता नंद मिश्र जी का नागरिक अभिनंदन अंगवस्त्र एवं श्रीफल देकर किया गया। कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रीय कथक संस्थान, लखनऊ की सचिव सरिता श्रीवास्तव की अवधारणा एवं परिकल्पना पर आधारित नृत्य नाटिका ‘ईदगाह’ का भव्य मंचन कथक संस्थान के कलाकारों द्वारा किया गया। मुख्य अतिथि ने कलाकारों को पुरस्कृत किया। कार्यक्रम का संचालन उपजा के महामंत्री सर्वेश कुमार सिंह एवं कार्यालय मंत्री पं. टीटी ‘सुनील’ द्वारा किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार एवं उपजा के संस्थापक सदस्य दादा पीके राय, वरिष्ठ पत्रकार वीर विक्रम बहादुर मिश्र, उपजा के अध्यक्षा रतन कुमार दीक्षित, महामंत्री सर्वेश कुमार सिंह, कोषाध्यक्ष सत्येन्द्र नाथ अवस्थी, कार्यालय मंत्री पं. टीटी ‘सुनील’ एवं वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद गोस्वामी, अजय कुमार, वीरेन्द्र सक्सेना, तारकेशवर मिश्र, राजीव शुक्ल, अरविन्द शुक्ल लखनऊ जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक मिश्र, महामंत्री भारत सिंह और कोषाध्यक्ष राजेश सिंह के अलावा बड़ी संख्या में पत्रकार एवं गणमान्य लोग मौजूद थे।

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