Mukesh Kumar : एक न्यूज़ चैनल में बड़ी ही शर्मनाक घटना घटी है। चैनल हेड ने अपने दो-तीन साथियों के साथ मिलकर एक असिस्टेंट प्रोड्यूसर की बड़ी बेरहमी से पिटाई की और फिर उसे ही नहीं, उसके साथ कुछ और लोगों को चैनल से एंटी चैनल एक्टिविटी के लिए निकाल दिया या निलंबित कर दिया। मुझे याद नहीं आता कि कभी किसी चैनल हेड ने ऐसी हरकत की होगी। ये न्यूज़ चैनलों के अंदर बिगड़ते माहौल की बानगी भी है और पत्रकारिता के गिरते स्तर की पराकाष्ठा भी। क्या ये चुप रहने का समय है?
Rajat Amarnath : प्रिय मुकेशजी आप जिस चैनल की बात कर रहे हैं वो है जहाँ के आप भी चैनल हेड रह चुके हैं और जिस व्यक्ति की आप बात कर रहे हैं, उसी व्यक्ति ने आपके कार्यकाल में भी अपने ही साथी का गला पकड़ा था और आपने ही माफ़ी भी मंगवाई थी और जिस के बचाव में आप आवाज़ उठाने की बात कर रहे हैं, उसी व्यक्ति ने दूसरे चैनल के अपने वरिष्ठ पर हाथ उठाने के चक्कर में अपनी नौकरी गंवाई थी, उसकी इसी काबलियत को देखते हुए आपने शायद नौकरी दी थी, जहाँ आप जैसे वरिष्ठ पत्रकार नौकरी देने के नाम पर पत्रकारों का शोषण करते हों और और नौकरी से निकालने के बाद भी लोगों को भड़काते हो वहां का तो माहौल बिगड़ेगा ही. आप शायद वो समय भूल गए जब बिना नंबर देखे आपने मुझे ही भरे न्यूज़ रूम में जलील करने की कोशिश की थी. उस समय भी आपका फ्रस्टेशन था और आज भी वही झलक रहा है. कृपया आप पत्रकार हैं पत्रकारिता की बात करें न कि लोगों को भड़काने की. आप तो अपने ६ महीने की सेलरी लेकर निकल चुके हैं और जो लोग आपकी झंडाबरदारी में से गए थे वो आज भी कहाँ हैं ज़रा उनसे पूछिए तब आप क्यूँ चुप रहे थे?
वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार के फेसबुक वॉल से साभार.





