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सुख-दुख...

..और वह ‘सहारा प्रणाम’ बोलता हुआ मार्क्सवाद की लफ्फाजी कर रहा होगा!

: चोरों, ठगों, देशघाती कारपोरेटों की चाकरी करने वाले हिंदी के वामपंथी क्रांतिकारी फिर भी सम्मानित रहेंगे : क्रिस गेल ने क्रिकेट के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा। एक असंभव-सा कारनामा। 30 गेंदों में शतक … और 20-20 में 175 रन। लेकिन उन्हें पुरस्कार दिया विजय माल्‍या ने। किंगफिशर के किंग। देश के कई हजार करोड़ रुपये खा जाने वाले।

: चोरों, ठगों, देशघाती कारपोरेटों की चाकरी करने वाले हिंदी के वामपंथी क्रांतिकारी फिर भी सम्मानित रहेंगे : क्रिस गेल ने क्रिकेट के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा। एक असंभव-सा कारनामा। 30 गेंदों में शतक … और 20-20 में 175 रन। लेकिन उन्हें पुरस्कार दिया विजय माल्‍या ने। किंगफिशर के किंग। देश के कई हजार करोड़ रुपये खा जाने वाले।

समुद्री जहाज में सेमी-न्यूड फोटोग्राफ्स का कैलेंडर और बियर के व्यापारी। सरकारी दामाद। इतिहास में माल्‍या को ठग और चोर या नशीले पेय का व्यापारी होने के लिए नहीं, एक सांसद और क्रिकेट के इतिहास में सबसे तेज शतक ठोंकने वाले क्रिस गेल को पुरस्कार देने के लिए जाना जाएगा।

अदालत ने ‘सहारा’ के सुब्रत राय से तीन करोड़ निवेशकों के चौबीस हजार मिलियन रुपये लौटाने को कहा, तो उसकी चिटफंड कंपनी ने 123 ट्रक में रसीदें-दस्तावेज भर कर खड़ा कर दिया और अदालत से बोला – ‘चेक कर लो, हमने सारे रुपये वापस कर दिये हैं।’ पूरी भारत सरकार चाहिए सहारा के कागजात देखने के लिए। ऐसी ठगी और सीना-जोरी क्या कभी हुई है? क्या इंडिया की नेशनल क्रिकेट टीम अभी भी अपने सीने में ‘सहारा’ का लोगो चिपकाएगी? इसके लिए सहारा ने क्रिकेट बोर्ड से जो डील किया होगा, उसमें देश के गरीब लोगों के चित-फंड से चुराये गये रुपये ही होंगे। पक्का है।

कोलगेट कांड में कौड़ी के मोल पर देश के प्राकृतिक संसाधनों को बेच डाला गया है। नीलामी पर समूचा देश है।

कुछ बोल कर देखिए, दर बदर हो जाएंगे। हर तनख्वाह-धारी तिकड़मी जुगाडू आपका दुश्मन बन जाएगा। दाने-दाने को तरस जाएंगे।

हिंदी के वे वामपंथी क्रांतिकारी इसके बाद भी सम्मानित रहेंगे, जिन्होंने इन चोरों, ठगों, देश घाती कारपोरेटों की चाकरी की है। सारा साहित्य इन्‍हीं का है। सारी नौकरियां इन्‍हीं की हैं। जरा इनसे पूछ कर देखिए कि आपका ससुर और बाप कौन है? लिख के लीजिए, वह भी हिंदी का कोई मठाधीश होगा … और वह 'सहारा प्रणाम' बोलता हुआ मार्क्सवाद की लफ्फाजी कर रहा होगा।

मुझे गर्व होता है कि अपने फुफेरे भाई की मृत्यु की शोक सभा में जाने पर इन्ही ‘हिंदी’ के 65 चापलूस जुगाडू और भ्रष्ट लेखकों ने मेरी ‘भर्त्सना’ की थी।

अभी भी मैं जिंदा हूं और वे अपनी अमीरी और ताकत पर इस अंधेरे समय में गदगद हैं।

क्या सन 1972 में फकत 2000 रुपये से चिटफंड का धंधा शुरू करने वाला व्यापारी 2013 में कई खरब का मालिक हो सकता है? इसे आजकल उसकी 'प्रतिभा', 'उद्यम' और 'लगन' का मिसाल कहा जाएगा। टीवी चैनल और अखबार उसकी शोहरत की डुगडुगी बजाएंगे … लेकिन कौन कहेगा वह चोर, ठग, देशघाती और लुटेरा है।

क्या कोई अकेला लेखक?

वह बरबाद कर दिया जायेगा। हर कोई उसकी 'खामियां' खोजेगा।

दिल्ली में जिसके पास मोटी तनख्वाह है और जुगाड़ … वही सम्मानित लेखक है!

धत!

उपरोक्त टिप्पणी के लेखक उदय प्रकाश मशहूर कवि, कथाकार, पत्रकार और फिल्मकार हैं.

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