Mayank Saxena : हाल ही में एक टीवी चैनल के एक डेस्क के कर्मचारी ने एक रेप पीड़िता के अस्पताल के नाम और बेड का नम्बर तक पैकेज में लिख दिया…सम्पादक के इस बाबत केबिन में बुलाकर चुपचाप पूछने पर भी उन्होंने अभद्रता से बात की…और उसके बाद सम्पादक से शारीरिक हिंसा करने की कोशिश की…सम्पादक महोदय अपने जेंटलमेन बिहेवियर के लिए ज़्यादातर जगह जाने जाते हैं…लेकिन इन महोदय ने हर तरह की अभद्रता की.
इसके बाद मामला थाने तक गया और रफा दफा हो गया…लेकिन एक स्वयंभू स्वकथित मार्क्सवादी सम्पादक (फिलहाल कहीं काम नहीं करते हैं) इस कर्मचारी को सही ठहराने में लगे हैं, जिसने एक यौन हिंसा पीड़िता की पहचान ज़ाहिर करने में कोई कसर नहीं छोड़ी…और सही बात कहने वाले सम्पादक के खिलाफ कैम्पेनिंग कर रहे हैं… ये सम्पादक महोदय इसी चैनल में सम्पादक रहे हैं…और इनके इतिहास के बारे में सिर्फ इतना बताया जा सकता है कि जनवादी सम्पादक महोदय जिस भी चैनल में रहे, उसे डब्बे में डाल कर और अच्छी खासी रकम खोंस कर ही निकले हैं…कर्मचारियों के बारे में कभी नहीं सोचा…बहुत सारे चैनल लांच करवाए हैं हालांकि बंद होने की नौबत तक ला कर अपना मामला सेट कर निकल लिए.
सम्पादक महोदय एक साहित्यिक पत्रिका में मीडिया को गरियाते हुए कॉलम लिखते हैं…कि मीडिया भ्रष्ट है, ये अलग बात है कि जब वो ये लिखते रहे…तब साथ साथ चिटफंडियों के चैनल भी चलाते रहै…इनके बारे में एक और बात कि इनके चेहरे पर कोई भाव नहीं आता है…न हंसी का…न दुख का…मतलब बहुत शातिर हैं…फिलहाल सम्पादक जी नए मुर्गे की ताक में हैं…देखें चिटफंडिया फंसता है या नेता…या फिर फिल्म निर्माता.
युवा पत्रकार मयंक सक्सेना के एफबी वॉल से साभार.





