नई दिल्ली : समाचार पोर्टल कोबरा पोस्ट ने 'रेड स्पाइटर 2' के अपनी एक खोजी रिपोर्ट में सार्वजनिक क्षेत्र के 23 बैंकों तथा बीमा कंपनियों पर मनी लांड्रिंग में शामिल होने का आरोप लगाया है। अनिरुद्ध बहल ने प्रेस कांफ्रेंस में सरकारी बैंकों के मनी लांड्रिंग की पोल खोली थी। इस खुलासे के बाद वित्त मंत्रालय ने संबद्ध बैंकों तथा भारतीय जीवन बीमा निगम के प्रमुखों को मामले की जांच करने को कहा है, वहीं बीमा नियामक इरडा ने स्वतंत्र रूप से मामले की जांच शुरू करने की बात कही है।
इस दूसरे सबसे बड़े खुलासे में कोबरा पोस्ट ने देश के प्रमुख बैंकों तथा बीमा कंपनियों पर देशभर में कानून का खुलेआम उल्लंघन करने और लोगों के बेनामी धन को वैध रूप देने में मदद करने का आरोप लगाया। मनी लांड्रिंग गतिविधियों में शामिल होने को लेकर जिन बैंकों और बीमा कंपनियों के खिलाफ आरोप लगे हैं, वे भारतीय स्टेट बैंक, केनरा बैंक, रिलायंस लाइफ, टाटा एआईए, यस बैंक, इंडियन बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, आईडीबीआई बैंक, ओरिएंटल बैंक आफ कॉमर्स, देना बैंक, कारपोरेशन बैंक, इलाहाबाद बैंक, सेंट्रल बैंक आफ इंडिया, धनलक्ष्मी बैंक, फेडरल बैंक, डीसीबी बैंक तथा बिड़ला सनलाइफ हैं।
कोबरापोस्ट ने आरोप लगाया है कि वित्तीय क्षेत्र की इकाइयां अपने ग्राहक की विधिवत सूचना प्राप्त करने की (केवाईसी) व्यवस्था का पालन किए बगैर ही ग्राहकों को बैंक खाते खोलने तथा लॉकर उपलब्ध कराने की पेशकश की। इसके जरिये उनके काले धन को सफेद बनाया गया और इसके लिए फर्जी पैन कार्ड लिए गए। पोर्टल की तरफ से कहा गया है कि कई महीनों तक किए गए स्टिंग ऑपरेशन में यह पाया गया है कि देश में सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के दर्जनों बैंक तथा बीमा कंपनियां मनी लांड्रिंग गतिविधियों में शामिल हैं। इस ऑपरेशन में कुल मिलाकर 23 बैंक और बीमा कंपनियों के बारे में ये बातें सामने आई हैं।





