यशवंत व अनिल भाई, नमस्कार, आपको बहुत हैरानी भरी खबर भेज रहा हूं। जनसंपर्क अधिकारी चाहे निजी कंपनी का हो या फिर सरकारी, बड़ा ही निरीह सा, खरगोश की तरह सहमा सहमा सा और नींद में उठा लो तो बस दूसरे को मक्खन लगाने वाला वगैरह वगैरह गुणों के लिए जाना जाता है। चापलूसी का धंधा करके उस बेचारे की इतनी हिम्मत नहीं होती कि एक चींटी को भी गुस्से में कुछ कह जाए, आदमी की बात तो दूर। अगर किसी को धमकाए तो उसका रोजगार रहेगा कहां, पत्रकार को धमकाए तो उसकी बैंड बजा देंगे।
लेकिन इस जाति का एक प्राणी, जो अंबाला में सरकारी तौर पर जिला जनसंपर्क अधिकारी है, ने खबर न छपने पर पत्रकारों को धमकाना शुरू कर दिया। इनके मुताबिक खबर न लगाई तो कई पत्रकारों से उलझ गए, इस कड़ी में दो रोज पहले जिले में तैनात एक अंग्रेजी अखबार के पत्रकार को खरी खोटी सुना दी। वजह यही थी कि इनके कहने से खबर नहीं लगाई, खबर भी सरकारी नहीं, हैरानी की बात है कि ये एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी की खबर लगवाने के लिए पत्रकारों से भिड़ते हैं।
ये हैं श्री केवल बिंद्रा जो कि अंबाला में तैनात सरकारी तौर पर जिला जनसंपर्क अधिकारी हैं। ये इन दिनों सरकारी काम के लिए कम और एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी, जहां इनका लाडला डाक्टरी कर रहा है, के प्रचार का जिम्मा ऐसा पकड़ा है कि अगर इनके कहने से कोई यूनिवर्सिटी की खबर न लगाए, तो उस पर राशन पानी लेकर चढ़ जाते हैं। इनके प्राइवेट यूनिवर्सिटी के प्रति मोह और पत्रकारों से ऐसे व्यवहार के चलते दैनिक जागरण अंबाला के पत्रकार ने चंडीगढ़ मुख्यालय में आरटीआई डाल दी है कि भाई सरकारी पीआरओ किस अधिकार से प्राइवेट यूनिवर्सिटी का प्रचार करता है।
इनके इस व्यवहार को लेकर सिर्फ पत्रकार अजर दीप लाठर ने ही आटीआई नहीं डाली, बल्कि हाल में इनकी धमकी के शिकार हुए अंग्रेजी अखबार के पत्रकार श्री प्रदीप राय ने बात सरकार के कानों तक पहुंचा दी है। अंबाला, जो कि हरियाणा का सबसे प्रमुख जिला है और जहां प्रेस का पार्दुभाव अंग्रेजों के जमाने में हो गया था, वहां बहुत से पत्रकार अब प्रशासन और सरकार से जवाब मांग रहे हैं कि भाई इस पीआरओ को धमकाने के लिए किस अधिकार से बिठाया गया है। बड़े वरिष्ठ पत्रकार भी इस बात पर लामबंद हो गए हैं, और पूछ रहे है कि आम आदमी के टैक्स से चलने वाला सरकारी दफ्तर किस अधिकार से प्राइवेट यूनिवर्सिटी की सेवा कर रहा है।
भाई कमाल तो इस बात का है कि इस बात का खुलासा हुआ है कि सरकारी गुड विल पर प्राइवेट यूनिवर्सिटी की खबरें छपवाकर ये पीआरओ साहिब अपने बेटे की फीस में कटौती कराने का लाभ लेते हैं। अब चूंकि सुपारी ली हैं तो अगर कोई पत्रकार खबर न लगाए, तो उससे ये लड़ पड़ते हैं। यशवंत जी, पत्रकारों के दुर्व्यवहार के इस दृश्य को भड़ास के आईने पर दिखाएं। आपकी मेहरबानी होगी। वैसे भगवान श्री बिंद्रा को सद्बुद्धि दें और उससे भी पहले बुद्धि दें, क्योंकि सद्बुद्धि बहुत बाद की चीज है।
सोनू कुमार की रिपोर्ट.





