Rajendra Gupta : यह कहना कितना गलत है कि अमर उजाला में शशि शेखर के आने के बाद दैनिक जागरण पिछड़ गया. यह तो वही "अपने मुंह मियां मिट्ठू" बनने वाली या शशि शेखर की चापलूसी वाली बात कही गयी है कि "अकेले शशि शेखर थे जिन्होंने लोकल खबरों को हाई लाइट करने के लिए नौ सूत्र बनाए। अमर उजाला को इन नौ सूत्रों का बहुत लाभ हुआ और दैनिक जागरण लोकल की इस रेस में पिछड़ा।"
शशि शेखर ने अमर उजाला में मालिकों को अपने प्रभाव में कर जो हिटलरशाही व मनमानी की उसके कारण ही वहां से अच्छे भले लोगों का पलायन शुरू हो गया आपने सही लिखा है कि "यह अलग बात है कि वे अपने बाद की नंबर दो टीम नहीं खड़ कर पाए। आज भी स्थिति यह है कि शशि शेखर अगर पहले पांवदान पर हैं तो बाद के दस पांवदान खाली हैं और उनके बाद नंबर दो की गिनती 11वें नंबर से शुरू होती है।"
शशि शेखर कभी नहीं चाहते थे कि कोई अकलदार व्यक्ति उनके बाद दूसरे से लेकर दसवें तक किसी भी नंबर पर रहे. उन्होंने केवल उन लोगों को अपने साथ जोड़ कर रखा जो या तो बेअक्ल थे या उनकी गुलामी बर्दाश्त करते रहे. सुभाष राय व बंशीधर मिश्र जैसे कई उदाहरण सामने हैं जिन्हें मजबूर होकर अमर उजाला छोड़ना पड़ा.
स्टेट टाइम्स के सीनियर मैनेजर राजेंद्र गुप्ता ने यह प्रतिक्रिया वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ला के एफबी वॉल पर कमेंट के रूप में की है.





