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एनएनआईएस के पत्रकारों ने डीएम को लिखा पत्र, 11 को देंगे धरना

अरुप घोष द्वारा संचालित न्‍यूज एजेंसी एनएनआईएस से जुड़े संवाददाताओं को एक साल से अधिक समय तक का पैसा नहीं मिला है. कंपनी की तरफ से लगातार मिल रहे आश्‍वासन से परेशान कर्मचारी अब अपने हक की लड़ाई लड़ने के लिए सड़क पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं. इसलिए उन्‍होंने गौतमबुद्धनगर के डीमए को पत्र लिखकर 11 मई को एनएनआईएस के कार्यालय के सामने धरना देने की जानकारी दी है.

अरुप घोष द्वारा संचालित न्‍यूज एजेंसी एनएनआईएस से जुड़े संवाददाताओं को एक साल से अधिक समय तक का पैसा नहीं मिला है. कंपनी की तरफ से लगातार मिल रहे आश्‍वासन से परेशान कर्मचारी अब अपने हक की लड़ाई लड़ने के लिए सड़क पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं. इसलिए उन्‍होंने गौतमबुद्धनगर के डीमए को पत्र लिखकर 11 मई को एनएनआईएस के कार्यालय के सामने धरना देने की जानकारी दी है.

कर्मचारियों ने डीएम को लिखे पत्र में यह भी बताया है कि अगर उनकी सैलरी नहीं मिली तो वे प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के ऑफिस तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी के घर के सामने भी धरना देंगे. नीचे डीएम को लिखा गया पत्र…


सेवा में,
जिलाधिकारी,
नोएडा, गौतमबुद्धनगर
उत्तर प्रदेश

विषय- आर्थिक शोषण और धोखाधड़ी के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन की पूर्व सूचना

महाशय,

उपरोक्त विषय के संबंध में सूचित करना है कि हम लोग आपके कार्यक्षेत्र नोएडा में सी-15-16, सेक्टर-6, नोएडा से संचालित हो रही न्यूज एजेंसी एनएनआईएस (नेटवर्क वन) के अंशकालिक/पूर्णकालिक संवाददाता के रूप में देश के अलग अलग हिस्सों से काम कर रहे रहे थे, लेकिन मीडिया के नाम पर इस कंपनी ने पिछले एक साल से जिस तरह से हम सबको बेवकूफ बनाया है वो किसी धोखाधड़ी से कम नहीं हैं। कंपनी के संवाददाताओं को पिछले एक साल से कोई पैसा नहीं मिला है। कुछ को मिला भी है तो वो उनके बकाये रकम के हिसाब से ऊंट के मुंह में जीरा के समान है। इस कंपनी के बारे में हम निम्न बातों की तरफ आपका ध्यान दिलाना चाहेंगे।

1.       एनएनआईएस देश के विभिन्न शहरों में लोगों को अपना संवाददाता नियुक्त करती है। उन्हें माइक आईडी भी प्रदान करती है। कई लोगों को अधिकृत पत्र भी दिया गया है। कंपनी की शर्त के अनुसार तीन महीने में एक बार पैसे का हिसाब होना था। लेकिन इसमें काफी अनियमितताएं बरती जा रही है। अगर किसी का डेढ़ से दो लाख बकाया होता है तो कंपनी उन्हें 5-10 हजार देकर रफा दफा करने की कोशिश करती है। यह पैसा भी काफी मिन्नत के बाद दिया जाता है।

2.       पैसा मांगने पर कई बार कंपनी के एकाउंटेट कुलवंत बुरे परिणाम भुगतने की भी धमकी देते हैं।  

3.       अगर कोई संवाददाता बकाये रकम के भुगतान के लिए ज्यादा दबाब बनाता है तो उसे हटाकर किसी दूसरे व्यक्ति को लुभावने सपने दिखाकर काम पर रख लिया जाता है। नतीजतन पुराने कर्मचारियों का पैसा डूब जाता है। कहना ना होगा एनएनआईएस किसी चिट फंड कंपनी से कम नहीं जो हजारों लोगों के सपनों के साथ खेल रही है।

4.       कई राज्यों में कंपनी यह व्यवस्था करती है कि वहां की राजधानी में नियुक्त अपने ब्यूरो चीफ को ही पूरे राज्य से खबर भेजने की जिम्मेदारी दे देती है। शर्त यह रहती है कि राजधानी से बाहर की खबरों के लिए अलग से पारिश्रमिक दिया जायेगा। लेकिन जब ये किसी ब्यूरो चीफ को हटाते हैं तो उसेक साथ साथ उनके साथ जुड़े राज्य भर के अंशकालिक संवाददाताओ के पैसे डूब जाते हैं।

5.       यू.पी. शासन के नियमों के मुताबिक नोएडा से संचालित होने वाली किसी भी कंपनी के लिए यह जरुरी है कि वो सिटी मजिस्ट्रेट के पास कंपनी से जुड़े कर्मचारियों का ब्यौरा जमा कराये। लेकिन एनएनआईएस ने अभी तक ऐसा नहीं किया है।

6.       सी-15-16, सेक्टर- 6 से कंपनी अवैध रुप से चल रही है। नोएडा प्राधिकरण के पास इसकी कोई सूचना नहीं है।

7.       सेक्टर-6 पुलिस चौकी में इस कंपनी के खिलाफ भी कर्मचारियों का पैसा हड़पने की शिकायतें दर्ज है।

अत: एनएनआईएस के इस शोषण और धोखाधड़ी के खिलाफ हम लोगों ने 11 मई को एनएनआईएस के दफ्तर के सामने शांतिपूर्ण धरना देने का फैसला किया है। अगर हमारी समस्याओं का हल नहीं हुआ तो हम 13 मई को प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और 15 मई को सूचना प्रसारण मंत्री के आवास पर धरना देंगे। यह आपके सूचनार्थ प्रेषित।

भवदीय  

एनएनआईएस के पीडित संवाददाता

प्रति-
1. मनीष तिवारी, सूचना प्रसारण मंत्री, भारतच सरकार
2. महानिदेशक, पीआईबी
3. चेयरमैन, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया
4. एसएसपी, नोएडा
5. सीईओ, नोएडा प्राधिकरण
6. सिटी मैजिस्ट्रेट, नोएडा
7. सीएम, उत्तर प्रदेश, लखनऊ

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