आदरणीय यशवंत जी, बड़े दुख के साथ आपको सूचित कर रहा हूं कि आपके वेबसाइट पर अंबाला के पत्रकार के साथ दुर्व्यवहार को लेकर जो समाचार छपा है वह बिल्कुल झूठा तथा बेबुनियाद है। हमारे देश में पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ समझा जाता है और लोकतंत्र को मजबूत बनाये रखने में इस तंत्र का सबसे बड़ा योगदान है। परंतु बडे अफसोस की बात है कि जिस प्रकार एक मछली सारे तालाब को गंदा कर देती है उसी प्रकार चंद लोग अपने स्वार्थों और अहम की खातिर इस स्तंभ को भी दूषित करने में लगे हुए हैं और अपनी मनमर्जी से दूसरे व्यक्ति पर इल्जाम लगाकर झूठी वाहवाही लूटने पर उतारू हैं।
पत्रकारिता के नाम पर लोगों को धमकाना, ब्लैकमेल करना व अन्य अनैतिक व असमाजिक कार्य करना इन लोगो का पेशा बन चुका है। पिछले दिनों अंबाला में ही पुलिस ने दो पत्रकारों को रंगे हाथों किसी व्यापारी को ब्लैकमेल करने के आरोप में गिरफ्तार किया था, लेकिन अफसोस की बात है कि जेल में रहने के बावजूद वही दोनों पत्रकार पुन: फिर से उसी कार्य में लगे हुए हैं।
इस समाचार के सबंध में मैं आपको यह बताना चाहता हूं कि मेरा इस समाचार पत्र को भेजने या छपवाने में कोई निजी स्वार्थ नहीं था। वैसे भी सरकार की ओर से हमें यह हिदायतें है कि हम सरकारी कार्यों को करने के साथ-साथ ऐसे कार्यों का भी प्रचार करे जो जनता के हित में हों। यह कार्यक्रम कैंसर की रोकथाम और लोगों को कैंसर से बचने के लिए जागरूक करने के साथ-साथ डाक्टरों तथा डाक्टरी की शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों को इस बीमारी से अवगत करवाने के लिए किया गया था, जिसमें उत्तर भारत से 200 से अधिक डाक्टरों व विद्यार्थियों ने भाग लिया था। मुझे यह समाचार ईमेल के माध्यम से जिला डैंटल एसोसिएशन के पदाधिकारी डा. एस.एस. आहलूवालिया द्वारा भेजकर छपवाने का अनुरोध किया गया था। डा. एस.एस. आहलूवालिया पिछले कईं वर्षो से अंबाला में स्कूली बच्चों के मुफ्त दंत चेकअप करने के साथ-साथ हर मास अंबाला हेल्थ एवं वेल्फेयर सोसायटी द्वारा आयोजित होने वाले मेडिकल कैंप में अपनी मोबाइल वैन के माध्यम से लोगों के दंत रोगों का मुफ्त उपचार करते हैं और प्रशासन को भी अन्य जनकल्याण के कार्यों में भी सहयोग करते हैं।
इस विश्वविद्यालय में न केवल देश बल्कि विदेशों से करीब 20 हजार विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जिनमें मेरा बेटा भी है। मैं आज तक कभी भी विश्वविद्यालय के किसी भी अधिकारी अथवा अन्य पदाधिकारी से नहीं मिला और न ही मैंने कभी विश्वविद्यालय से अपने बेटे की पढ़ाई को लेकर एक रुपये का लाभ उठाया है। जिस पत्रकार ने यह आरोप लगाया है यद्यपि वह बहुत बड़े अखबार का सवांददाता बताता है लेकिन उसकी कार्यप्रणाली और व्यवहार के बारे में यहां के पत्रकार व अधिकारी ज्यादा बता सकते हैं। यह पत्रकार सरकार से मान्यता प्राप्त है और कहता है कि सरकारी खबरें छापना उनकी नीति में नहीं है।
मैंने इस संवादाता से सम्मान स्वरूप अनुरोध किया था कि वह जनहित में इस समाचार को पढ़ लें और हो सके तो छपवाने की कोशिश करें तो उसका यह जवाब था कि वह प्राइवेट खबरें नहीं पढ़ता। इसके साथ-साथ उसने दूरभाष पर जिला उपायुक्त एवं सरकार के बारे में भी बड़ी अशोभनीय टिप्पणियां की। उसने एक अन्य शरारती पत्रकार, जिसका अभी अंबाला से कई शिकायतों के बाद तबादलता हो गया है, के साथ मिलकर मेरे खिलाफ यह साजिश रची है तथा मैं इनके समाचार पत्रों के संपादकों व सरकार से भी इस बारे में अवगत करवा रहा हूं। मैं पिछले करीब 30 वर्षों से इस विभाग में कार्यरत हूं तथा मेरी कार्यप्रणाली के बारे में जिला के पत्रकारों, छायाकारों, अधिकारियों व संस्थाओं से पूछ सकते हैं। आपसे प्रार्थना है कि आप इस सच्चाई से लोगों को अवगत करवायें।
धन्यावाद।
(केवल बिन्द्रा)
जिला सूचना एवं लोक संपर्क अधिकारी
अंबाला, पंजाब
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