नई दिल्ली : एक तरफ भारत सरकार कह रही है कि उसने चीन के साथ कोई डील नहीं की, बल्कि कूटनीतिक तरीके से उसे लद्दाख की सीमा से पीछे हटने पर मजबूर किया है. लेकिन अब डील का असर दिखने लगा है और भारतीय सेना ने सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण चुमार पोस्ट से अपने बंकर हटाने शुरू कर दिए हैं. बताया जा रहा है कि दोनों देशों के बीच फ्लैग मीटिंग में हुए समझौते के तहत ही भारतीय सेना लद्दाख की चुमार पोस्ट से अपने बंकर तोड़ रही है. इससे पहले विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा था कि चीन के साथ अतिक्रमण मसले को बिना किसी डील के हल किया गया है. लेकिन अब जिस तरह से भारतीय सेना अपने बंकर तोड़ रही है उससे खुर्शीद के दावों पर सवालिया निशान उठ रहे हैं.
पिछले हफ्ते जब यह खबर आई कि चीनी सेना लद्दाख में भारतीय जमीन से पीछे हट गई है तो किसी को यकीन नहीं हुआ. हर कोई सोच रहा था कि बगैर कोई सख्ती दिखाए भारत ने चीन को पीछे हटने पर कैसे राजी कर लिया. लेकिन बाद में पता चला कि चीन ने ऐसे ही अपनी जिद नहीं छोड़ी, बल्कि उसे राजी करने में भारत को सामरिक दृष्टि से अहम चुमार पोस्ट हटाने पर राजी होना पड़ा.
सूत्रों का कहना है कि चीनी फौज लद्दाख से इसी शर्त पर हटने को राजी हुई कि भारत चुमार से अपना पोस्ट हटा लेगा. दरअसल, पूर्वी लद्दाख के चुमार पोस्ट से भारतीय फौज चीनी हाईवे की गतिविधियों पर नजर रखती हैं. चीन बहुत पहले से भारत से चुमार का फॉरवर्ड ऑब्जर्वेशन पोस्ट हटाने की मांग करता रहा है. साफ है कि सरकार जिसे कूटनीतिक जीत करार दे रही है, उसकी बड़ी कीमत चुकाई गई है. उधर, 1962 की जंग देख चुके समजावादी पार्टी के मुलायम सिंह यादव सरीखे नेता अभी भी चीन पर भरोसा करने को तैयार नहीं. उन्होंने कहा था, 'चीन पर भरोसा मत कीजिए. उसने सब देख लिया है. हमला जरूर करेगा.'
सूत्रों के अनुसार बंकर तोड़ने का कार्य जारी है। चीन के साथ घुसपैठ मसले को हल करने के लिए दोनों देशों के बीच पारस्परिक सहमति के तहत यह बंकर तोड़े जा रहे हैं। सीमा पर हालिया तनाव को खतम करने के लिए दोनों देशों की सेना के बीच फ्लैग मीटिंग में हुई सहमति के आधार पर बंकर तोड़े जा रहे हैं। दौलत बेग ओल्डी (डीओबी) इलाके में भारतीय सीमा के 19 किलोमीटर अंदर डेपसांग में चीनी सेना के घुस आने के बाद इन बंकरों में भारतीय सेना गई ताकि चीनी सैनिकों को पीछे हटाया जा सके। सूत्रों ने कहा कि यह बंकर कुछ माह पहले ही तैयार किए गए थे। बंकरों का टूटना एक तरह से भारत के लिए रणनीतिक हानि माना जा रहा है।
चुमार के झिपूगी अर्ला इलाके के बंकरों से भारतीय सेना चीन की सैन्य गतिविधियों पर गहरी नजर रख रही थी। यहां से चीन के इलाके साफ दिखते हैं तथा वहां की सड़कों के महत्वपूर्ण जुड़ाव की जानकारी भी मिलती है। फ्लैग मीटिंग में चीन ने इन बंकरों पर आपत्ति जताई, जिसके बाद इन्हें तोड़ने पर सहमति बनी। चर्चा में चीन भारत से अपने बंकर तोड़ने के एवज में डीओबी से अपने सैनिकों को हटाने पर राजी हुआ। उल्लेखनीय है कि डीओबी इलाके में चीन ने अपने पांच तंबू गाड़ दिए थे। वहां वाहनों के साथ करीब 50 सैनिकों की तैनाती भी कर दी थी। भारत ने इस पर कड़ा रुख अख्तियार किया। दोनों देशों के बीच इस मसले पर 21 दिनों तक तनाव रहा। बाद में फ्लैग मीटिंग में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच चर्चा हुई।
टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक चीन के साथ बने गतिरोध को खत्म करने में शामिल सुरक्षा बलों के करीबी सूत्रों और वैसे स्थानीय लोग जो वहां की भौगोलिक स्थिति करीब से जानते हैं उन्होंने अखबार को बताया कि चीनी सेना लद्दाख के देपसांग से तब गई जब भारतीय सेना चुमार से बंकर नष्ट करने के लिए राजी हुई। इसी बंकर के जरिए भारतीय जवान कराकोरम हाईवे पर नजर रखते थे। भारतीय सैनिक रोज चुमार पोस्ट से बंकर तक गश्त लगाते थे। अचानक भारतीय सैनिक गश्ती के दौरान भारतीय सीमा में 19 किलोमीटर अंदर चीनी सैनिकों के टेंट देखकर हैरान रह गए। आपको बता दें कि चीन ने शर्त रखी थी कि भारत पूर्वी लद्दाख में स्थायी निर्माण का काम बंद करे। इस शर्त पर ही चीन सीमा पर 15 अप्रैल से पहले की स्थिति बहाल करने के लिए राजी था।
चीन पहले से ही भारत द्वारा दौलताबेग ओल्डी, फुक्चे और न्योमा में कराए जा रहे निर्माण कार्यों से खार खाए हुए है। लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर पिछले चार-पांच सालों से भारत द्वारा आधारभूत ढांचा विकसित करने को लेकर चीन असहज था। इन निर्माण कार्यों से पूर्वी लद्दाख में भारतीय सेना का मूवमेंट आसान हो गया था जो कि चीन को बर्दाश्त नहीं हो रहा था। चीन ने कई बार चुमर पोस्ट पर लगे निगरानी कैमरों के तार को काटने की भी कोशिश की थी। 21 अप्रैल की दूसरी फ्लैग मीटिंग में ही चीन ने चुमार पोस्ट पर आपत्ति जताते हुए इसे नष्ट करने के लिए कहा था। भारत की तरफ से कहा गया कि यह महज गश्ती दल के लिए रोज की बर्फीली हवाओं से बचाव के लिए है। लेकिन चीन इसे मानने को तैयार नहीं था।





