''दहेज कानूनों का कई बार इस्तेमाल मनमानी के लिए किया जाता है… कुछ लड़कियां अपने रिश्ते को अपने हिसाब से चलाने के लिए वह दहेज कानूनों का सहारा ले रही हैं…'' यह दलील गुरुवार को कड़कडड़ूमा कोर्ट में एक अभियुक्त के वकील ने दी। साथ ही उसके वकील ने कोर्ट को बताया कि दहेज के फर्जी मुकदमें में उसका मुवक्किल पिछले छह दिन से जेल में है। दोनों पक्षों की दलीले सुनने के बाद कोर्ट ने अभियुक्त को 25 हजार रुपये की जमानत पर छोडऩे का आदेश दिया।
इस मामले में रोचक बात यह है कि शिकायतकर्ता महिला अभी भी अपने पति के ही साथ रहना चाहती है और अपना किसी तरह का दहेज का सामान वापस नहीं चाहती। अपनी पति की अग्रिम जमानत के तहत अपने बयान कोर्ट में दर्ज कराए थे। इस पर अभियुक्त के वकील पीयूष जैन ने दलील दी थी कि यदि अभियुक्त दहेज मांगता है और बुरा आदमी है तो वह उसके साथ क्यों रहना चाहती है। इसके अलावा पूरी एफआईआर में कहीं भी दहेज मांगने जैसी कोई शिकायत नहीं की गई है। कोर्ट के सामने शिकायतकर्ता ने कहा कि वह अपने पति को नहीं उसके परिवार को जेल भेजना चाहती है।
सूत्रों के अनुसार, उत्तर पूर्वी जिले के सीलमपुर थाने के तहत आने वाले शास्त्री पार्क में रहने वाली प्रीति जैन ने अपने सचिन जैन और उसके परिवार के खिलाफ दहेज मांगने का मुकदमा दर्ज कराया था। इस सिलसिले में 4 मई को सीलमपुर पुलिस ने सचिन को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। गुरुवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने अभियुक्त के वकील पीयूष जैन ने कोर्ट को बताया कि शिकायतकर्ता के खिलाफ भी उसकी भाभी ने दहेज के लिए प्रताड़ित करने का मामला दर्ज कराया था। उसका बाद में निपटारा किया गया।





