हाईकोर्ट ने कांग्रेस सांसद नवीन जिंदल सहित 17 अन्य के खिलाफ मानहानि के मामले में पुलिस को जांच करने का निर्देश देने संबंधी मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के फैसले को रद्द कर दिया है। अदालत ने उस फैसले को भी रद्द कर दिया है, जिसमें जिंदल को याची द्वारा मांगे गए दस्तावेज प्रदान करने का आदेश दिया गया था।
हाईकोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट मछली को जाल में फंसाने के जांच के आदेश नहीं दे सकते। मजिस्ट्रेट ने जी न्यूज संपादक सुधीर चौधरी की मानहानि मामले में दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया था। न्यायमूर्ति कैलाश गंभीर ने 118 पेज के आर्डर में कहा कि मजिस्ट्रेट ने सुधीर चौधरी की शिकायत पर अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर पुलिस को जांच के आदेश दिए। अदालत किसी भी मामले में संज्ञान के दौरान ऐसे जांच के आदेश नहीं दे सकती। ऐसे में उनके आदेश को रद्द किया जाता है।
मजिस्ट्रेट ने 15 जनवरी को सुधीर की मानहानि याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली पुलिस को जिंदल व 16 अन्य के खिलाफ जांच के आदेश दिए थे। इतना ही नहीं पुलिस को जिंदल से संबंधित दस्तावेज भी दिलवाने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट ने फैसले को रद्द करते हुए कहा कि किसी भी मानहानि के मामले में यानी निजी शिकायत पर याची को ही आरोप साबित करने होते हैं न कि पुलिस को जांच का आदेश दिया जाए।
दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156 (3) के तहत मजिस्ट्रेट को मुकदमा दर्ज करने और जांच के आदेश देने का अधिकार है लेकिन ऐसे मामलों में जांच का आदेश देना गैरकानूनी फैसला है। हाईकोर्ट ने यह फैसला जिंदल कंपनी के अधिकारी तेज किशन द्वारा निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने संबंधी याचिका का निपटारा करते हुए दिया। याची के अधिवक्ता ने कहा कि मजिस्ट्रेट ने हमारे खिलाफ ही दायर याचिका पर हमें ही साक्ष्य के रूप में दस्तावेज याची को प्रदान करने का निर्देश दिया है। जबकि शिकायतकर्ता के पास ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे साबित हो कि हमने उसकी प्रतिष्ठा नष्ट की है।
जी न्यूज के संपादक और मालिकों ने मिलकर उनके मुवक्किलों की प्रतिष्ठा खराब करने का प्रयास किया है। इतना ही नहीं खबरें रोकने के लिए 100 करोड़ रुपये भी मांगे जिस पर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था। ऐसे में इन लोगों ने हमारी प्रतिष्ठा नष्ट की है न कि हमने। चौधरी व अन्य ने आरोप लगाया था कि जिंदल सहित 17 अन्य ने संवाददाता सम्मेलन बुलाकर उनके खिलाफ झूठा प्रचार किया। इसी के आधार पर ब्रॉडकास्टिंग एडिटर एसोसिएशन ने उनके खिलाफ कार्रवाई की। उन्होंने कहा यह उनकी प्रतिष्ठा नष्ट करने का प्रयास है। अत: सभी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के अलावा पुलिस को जांच के आदेश दिए जाएं। (अउ)





