इलाहाबाद। यूपी में वाकई जंगल राज है। रोम जल रहा है और नीरो बंशी बजाने में मस्त हैं। ताजा उदाहरण प्रतापगढ़ जिले की यह घटना है। जो किसी भी सभ्य समाज का सिर नीचा झुका देने के लिए काफी है। मदर्स डे के दो दिन पहले सूबे के प्रतापगढ़ जिले में बिन ब्याही मां बनी एक किशोरी को ‘पंच परमेश्वरों’ ने बेहद शर्मनाक फैसला सुनाया। कुकर्मी अधेड़ को पचास हजार रुपए जुर्माना देना होगा। इसके अलावा रेप का आरोपी हर महीने किशोरी को पांच सौ रुपए परवरिश के नाम पर देगा। बच्चे के बड़ा होने के बाद किशोरी उसे आरोपी को सौंप देगी। तब तक भुक्तभोगी किशोरी अपनी शादी भी नहीं कर सकती। हैरान कर देने वाला यह मामला प्रतापगढ़ जिले के सांगीपुर थाना क्षेत्र के आमी शंकरपुर गांव का है।
आमी शंकरपुर गांव के अधेड़ उम्र के एक व्यक्ति की पत्नी की मृत्यु दो साल पहले हो गई। इसके कुछ दिनों के बाद उसने सत्रह वर्षीय किशोरी को हवस का शिकार बना लिया। किशोरी प्रेगनेंट हो गई। दोनों पक्षों में झगड़ा होने लगा। कुछ दिन पहले किशोरी ने एक बच्चे को जन्म दिया। विवाद बढ़ा तो गांव के चौधरियों को पंचायत करने का मौका मिल गया। दस मई को गांव में आनन फानन बुलाई गई पंचायत में भुक्तभोगी किशोरी के घर वालों और कुकर्म के आरोपी अधेड़ को भी बुलाया गया।
पंचों ने किशोरी की अस्मत की कीमत पचास हजार रुपए आंकते हुए उसे भुगतान करने को कहा। अधेड़ के राजी होने पर पंचों ने यह भी फैसला दिया कि रेप का आरोपी परवरिश के लिए हर महीने पांच सौ रुपए भी किशोरी को देगा। बच्चा जब बड़ा हो जाए तो किशोरी अपने उस बच्चे को आरोपी को सौंप दे। पंचों ने यह भी शर्त रखी कि तब तक किशोरी को बिन ब्याही मां की तरह होगा। परिजन कहीं उसकी शादी भी नहीं कर सकते। इससे भी बड़ा शर्मनाक पहलू तो यह है कि इस पूरे मामले की जानकारी सांगीपुर थाने की पुलिस को नहीं है।
इलाहाबाद से शिवाशंकर पांडेय की रिपोर्ट.






