नमस्कार, मेरा नाम भानू प्रताप मौर्या है और मैं गाजीपुर जिले का रहने वाला हूँ. मैं आप को RTO गाजीपुर में व्याप्त भ्रष्टाचार से अवगत करना चाहता हूं. अगर हम ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने जायेंगे तो बिना दलालों के तो कोई काम होगा भी नहीं, अगर हम सब कुछ करा कर आखिरी सिग्नेचर कराने के लिए बड़े अधिकारी के पास जाये तो कुछ उटपटांग सवाल पूछ कर हमें वापस भेज दिया जाता है और हार कर हमें दलालों के पास जाना ही होता है।
हमारे एक मित्र भी यही गलती कर दी थी। सारे काम करा कर मेन RTO अधिकारी के पास जब सिग्नेचर कराने पहुंच गये तो उनसे भी वही सब सवाल पूछा गया और उसने सारे का जबाब दे दिया, तब अधिकारी ने साथ बैठे दलालों से हंसी करते हुए कहा कि "कुछ लोग अपने को बड़ा होशियार समझते हैं" फिर कुछ उल्टे-सीधे सवाल कर के उसे बाहर भेज दिया। उसे भी हार कर दलालों से ही संपर्क करना पड़ा।
जब दलालों से पूछा जाता है कि इन पैसों में उनको कितना बचता है तो उनका जबाब होता है उनका कहना होता है कि उनके पास सिर्फ 80 -100 रुपये ही बचते हैं और 200 रुपये बड़े साहब के सिग्नेचर पर दिया जाता है। ये बात 3 महीने पुरानी है। जब दलाल हो और काउंटर पर लर्निंग हो या फुल २० साल का 500 रूपये लिए जाते थे यानी कुल मिला कर 1000 रुपये। जब कि RTO की वेबसाइट पर फीस केवल 70 रुपये का ही जिक्र है। अगर हम काउंटर कर 70 रुपये का जिक्र करते हैं तो उनका कहना होता है कि अगर 70 रुपये में बनवाना है तो शाम 6-7 बजे तक बड़े साहब का इंतजार करो अगर वे आ गए तो बनवा लेना 70 रुपये में।
जब मैंने दलाल से बात की कि साहब पर कोई वक्त की पाबन्दी नहीं है तो दलाल बोला कि साहब की 24 घंटे की ड्यूटी रोड पर है, इसीलिए महीनों के लाखों रुपये कमा ले तो कोई पूछने वाला नहीं है कि ऑफिस क्यों लेट आते हैं। ये इस पोस्ट की गरिमा है, ऐसा जबाब मिला था। 1 मई से गाजीपुर में डिजिटल प्रक्रिया से लाइसेंस बनना प्रारंभ हो गया है और उसका भाव 500 रुपये से बढ़ा कर 1300 से 1500 रुपये प्रति लाइसेंस कर दिया गया है। यानि की लर्निंग और फुल मिला कर 2600 से 3000 रुपये तक हो गया है। उन पे लगाम लगाने वाला कोई भी नहीं है।
भानू प्रताप मौर्य





