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सीबीआई डायरेक्टर के पास केवल इंस्पेक्टर की तैनाती का ही अधिकार है : रंजीत सिन्हा

: इंटरव्यू में CBI चीफ ने बताया, उनके कितने ‘मालिक’हैं! : कोयला घोटाले में सीबीआई के हलफनामे और उस पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी से आईपीएस लॉबी बेहद खुश है। ये कहना है खुद सीबीआई डायरेक्टर रंजीत सिन्हा का। रंजीत सिन्हा ने एक अंग्रेजी अखबार को दिए इंटरव्यू में ये इशारा किया है कि किस तरह से सुप्रीम कोर्ट की ये टिप्पणी कि सीबीआई तोता है, एक कड़वी सच्चाई है। सीबीआई ऐसा तोता है जिसके कई मालिक हैं। वो पिंजरे में बंद ऐसा तोता है जो अपने मालिक की बोली बोलता है। सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी ने सीबीआई को झकझोर दिया है।

: इंटरव्यू में CBI चीफ ने बताया, उनके कितने ‘मालिक’हैं! : कोयला घोटाले में सीबीआई के हलफनामे और उस पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी से आईपीएस लॉबी बेहद खुश है। ये कहना है खुद सीबीआई डायरेक्टर रंजीत सिन्हा का। रंजीत सिन्हा ने एक अंग्रेजी अखबार को दिए इंटरव्यू में ये इशारा किया है कि किस तरह से सुप्रीम कोर्ट की ये टिप्पणी कि सीबीआई तोता है, एक कड़वी सच्चाई है। सीबीआई ऐसा तोता है जिसके कई मालिक हैं। वो पिंजरे में बंद ऐसा तोता है जो अपने मालिक की बोली बोलता है। सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी ने सीबीआई को झकझोर दिया है।

एक अंग्रेजी अखबार को दिए इंटरव्यू में रंजीत सिन्हा ने तफ्सील से समझाया है कि कैसे सीबीआई हर काम के लिए मंत्रालयों, विभागों या दूसरी स्वायत्त संस्थाओं की मोहताज है। कैसे उसे एक-एक चीज के लिए दूसरों का मुंह देखना पड़ता है। सीबीआई डायरेक्टर के मुताबिक इस वक्त वो पांच मंत्रालयों, विभागों या स्वायत्त संस्थाओं पर निर्भर हैं। सिन्हा ने कहा कि ‘आज मैं पूरी तरह से सरकार पर निर्भर हूं। चाहे वो अफसरों के बारे में हो, बुनियादी ढांचे की बात हो या फिर संसाधनों के बारे में हो। इसलिए ये भी तय है कि मैं सरकार का हिस्सा हूं। सीबीआई डायरेक्टर के पास केवल इंस्पेक्टर की तैनाती का ही अधिकार है। इससे ज्यादा कोई अधिकार नहीं है।’

1. अफसरों पोस्टिंग के लिए उन्हें गृह मंत्रालय का मुंह देखना पड़ता है। उससे इजाजत लेनी पड़ती है।

2. सीबीआई कार्मिक मंत्रालय के अंतर्गत आता है। सीबीआई को इसे रोज ब रोज के कामकाज की जानकारी देनी होती है। कार्मिक मंत्रालय ही सीबीआई के लिए फंड का इंतजाम करता है। साथ ही अफसरों की भर्ती का भी काम देखता है।

3. डिप्टी एसपी रैंक से ऊपर के अधिकारियों की भर्ती यूपीएससी देखता है।

4. सीबीआई के किसी भी केस को लड़ने के लिए वकील कानून मंत्रालय मुहैया कराता है। कानून मंत्रालय ही उनकी फीस भी देता है।

5. भ्रष्टाचार के मामलों के लिए सेंट्रल विजिलेंस कमेटी यानि सीवीसी के पास जाना होता है।

अंग्रेजी अखबार को दिए गए इंटरव्यू में रंजीत सिन्हा ये साफ करने की कोशिश कर रहे थे कि सीबीआई के पैरों में बंधी ये बेड़ियां उनके कामकाज को, उनकी जांच की निष्पक्षता को प्रभावित करती हैं, उनके योग्य अफसरों की टीम को आजादी से काम करने से रोकती हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को 10 जुलाई तक सीबीआई को स्वायत्त किए जाने की योजना सरकार से पेश करने को कहा है। अंग्रेजी अखबार को दिए इंटरव्यू में रंजीत सिन्हा सुप्रीम कोर्ट के इस रुख पर खुशी जाहिर कर रहे हैं। ये बता रहे हैं कि खुश सिर्फ वो ही नहीं हैं, पूरी आईपीएस लॉबी है।

रंजीत सिन्हा ने कहा ‘पूरा आईपीएस कैडर कोर्ट के दृष्टिकोण से खुश है। सीबीआई नौकरशाही से आजाद होगी। हमारे पास ऐसी पेशेवर टीम है जिसने कई मामलों में शानदार काम किया है। पेशेवर आजादी हमारे हाथ और मजबूत करेगी। वो हमें इस बात की आजादी देगी कि हम कोई भी जांच सम्मान के साथ कर सकें।’ सीबीआई निदेशक को उम्मीद है कि उनकी जांच सरकारी हस्तक्षेप से आजाद होगी। 10 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की योजना उनकी इस आशा पर कितनी खरी उतरती है इसका इंतजार देश को भी है। (आईबीएन7)

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