कार्टून के जरिए पूरे देश में सरोकार और संघर्ष की लौ फैलाने वाले इस शख्स ने पत्रकारिता को उंचाई दी. करप्शन पर केंद्रित कार्टून के कारण असीम त्रिवेदी को सत्ता-सिस्टम ने अपने निशाने पर लिया लेकिन असीम त्रिवेदी ने झुकने की जगह, समझौता करने की जगह, डरने की जगह सत्ता-सिस्टम से लड़ने का फैसला लिया और खूब लड़े भी. अभिव्यक्ति की आजादी की अलख जगाते रहे. उनकी अकेली आवाज देखते देखते पूरे देश की आवाज बन गई.
करप्शन पर कार्टून बनाने के कारण असीम की वेबसाइट बैन किए जाने और असीम पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किए जाने
के बाद असीम त्रिवेदी ने सत्ता व सिस्टम की तानाशाही का विरोध करने का फैसला लिया. शुरुआत कुछ साथियों के साथ मिलकर पदयात्रा के जरिए की. बाद में जब असीम की गिरफ्तारी हुई तो यह प्रकरण पूरे देश में बड़ा मुद्दा बना. असीम त्रिवेदी हर तरह के जनपक्षधर आंदोलनों में हिस्सा लेते हैं. जन हित के मसले पर हमेशा सत्ता-सिस्टम से पंगा लेने को तैयार रहते हैं. भड़ास की तरफ से इस शख्स को 'भड़ास विशिष्ट सम्मान 2013' से सम्मानित करने का फैसला किया गया है. असीम त्रिवेदी को यह सम्मान 17 मई को दिल्ली में राजेंद्र भवन में आयोजित भड़ास स्थापना दिवस के पांचवें जलसे में चर्चित पत्रकार अनिरुद्ध बहल के हाथों दिया जाएगा.
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