Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

प्रिंट-टीवी...

उत्‍तराखंड के सभी जिलों में दिखने वाले चैनलों को ही मिलेगा सरकारी विज्ञापन

उत्‍तराखंड में न्‍यूज चैनलों के विज्ञापन वसूली अभियान पर लगाम लगने वाली है. खबर है कि शासन की तरफ इस तरह के दिशा निर्देश तैयार हो रहे हैं कि जो चैनल पूरे राज्‍य में दिखेंगे, अधिकतम रेट पर सरकारी विज्ञापन उन्‍हें ही मिलेगा. अब तक राज्‍य के कुछ जिलों या फिर देहरादून में ही दिखने वाले चैनल जमकर सरकारी विज्ञापन वसूलते थे, लेकिन इस फरमान के बाद कई चैनलों के आमदनी पर ब्रेक लग जाएगी.

उत्‍तराखंड में न्‍यूज चैनलों के विज्ञापन वसूली अभियान पर लगाम लगने वाली है. खबर है कि शासन की तरफ इस तरह के दिशा निर्देश तैयार हो रहे हैं कि जो चैनल पूरे राज्‍य में दिखेंगे, अधिकतम रेट पर सरकारी विज्ञापन उन्‍हें ही मिलेगा. अब तक राज्‍य के कुछ जिलों या फिर देहरादून में ही दिखने वाले चैनल जमकर सरकारी विज्ञापन वसूलते थे, लेकिन इस फरमान के बाद कई चैनलों के आमदनी पर ब्रेक लग जाएगी.

दरअसल, उत्‍तराखंड में ऐसे कई रीजनल और नेशनल चैनल हैं, जो केवल राजधानी देहरादून में ही दिखाई पड़ते हैं, पर जमकर उंचे रेट पर सरकारी विज्ञापन वसूली करते हैं. ऐसे चैनलों को विज्ञापन दिए जाने से सरकार की रीति और नीति राज्‍य के अन्‍य हिस्‍सों में रहने वाले लोगों तक नहीं पहुंच पाती है. यानी चैनल तो मोटी रकम बना लेते हैं लेकिन राज्‍य सरकार की मंशा पूरी नहीं हो पाती है. इसलिए अब राज्‍य के सभी तेरह जिलों में दिखने वाले चैनलों को ही अधिकतम रेट पर सरकारी विज्ञापन मिलेगा.

इसके लिए सूचना विभाग के वरिष्‍ठ अधिकारी जिला सूचना अधिकारियों से जिले में दिखाई पड़ने वाले चैनलों की रिपोर्ट मंगा रहे हैं. शासन के इस कदम से तमाम चैनलों तथा उनके कर्ताधर्ताओं में हड़कम्‍प मचा हुआ है, क्‍योंकि डिस्‍ट्रीब्‍यूशन खर्च बचाने के चक्‍कर में तमाम चैनल राजधानी देहरादून के अलावा कहीं और दिखाई ही नहीं पड़ते हैं. तमाम लोग शासन की तरफ से उठाए जाने वाले इस कदम की तारीफ कर रहे हैं. उनका मानना है कि सरकारी धन लूटने वाले लोगों को सबक मिलना ही चाहिए.

सूत्रों का कहना है कि तमाम चैनलों के कर्ताधर्ता सरकार पर दबाव बनाकर डीएवीपी से ज्‍यादा रेट पर विज्ञापन वसूलते हैं, जबकि उनके चैनल सभी जिलों में दिखाई नहीं पड़ते हैं. इसलिए विभाग की तरफ से सरकारी धन का बंदरबाट रोकने के लिए यह बढि़या कदम उठाया जा रहा है. खबर है कि सभी जिलों में दिखने वाले चैनलों को सात सौ रुपये प्रति दस सेकेंड, राज्‍य के आधे जिलों में दिखने वाले चैनलों को इसके आधी रकम और क्रमश: इसी तरह जिलों में दिखने के हिसाब से विज्ञापन रेट दिए जाने की कार्रवाई की जा रही है.

सूत्र बताते हैं कि विभाग की इस कार्रवाई से कथित चैनलों का प्रबंधन भड़का हुआ है. वे शासन पर दबाव बनाने की रणनीति भी अख्तियार कर रहे हैं. अब देखना है कि शासन सूचना विभाग के इस अच्‍छे कदम का सपोर्ट करते हुए चैनलों की डीएवीपी से ज्‍यादा दर पर किए जा रहे विज्ञापन वसूली पर लगाम लगाता है या फिर मीडिया मोनोपोली के आगे घुटने टेक देता है.   

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...