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भड़ास विशिष्ट सम्मान 2013 : (3) दयानंद पांडेय

दयानंद पांडेय विशुद्ध कलमजीवी शख्स हैं. कलम के जरिए उन्होंने पत्रकारिता और साहित्य में अपना मुकाम बनाया है. खरी-खरी लिखने-कहने वाले दयानंद पांडेय लखनऊ में रहते हुए भी अब पूरे देश में जाने जाते हैं. प्रिंट मीडिया, साहित्य, न्यू मीडिया, ब्लाग, सोशल मीडिया… हर कहीं बेहद सक्रिय दयानंद पांडेय अपनी कहानियों और उपन्यासों के मार्फ़त लगातार चर्चा में रहते हैं. दयानंद पांडेय का जन्म 30 जनवरी, 1958 को गोरखपुर ज़िले के एक गांव बैदौली में हुआ. हिंदी में एम.ए. करने के पहले ही से वह पत्रकारिता में आ गए।

दयानंद पांडेय विशुद्ध कलमजीवी शख्स हैं. कलम के जरिए उन्होंने पत्रकारिता और साहित्य में अपना मुकाम बनाया है. खरी-खरी लिखने-कहने वाले दयानंद पांडेय लखनऊ में रहते हुए भी अब पूरे देश में जाने जाते हैं. प्रिंट मीडिया, साहित्य, न्यू मीडिया, ब्लाग, सोशल मीडिया… हर कहीं बेहद सक्रिय दयानंद पांडेय अपनी कहानियों और उपन्यासों के मार्फ़त लगातार चर्चा में रहते हैं. दयानंद पांडेय का जन्म 30 जनवरी, 1958 को गोरखपुर ज़िले के एक गांव बैदौली में हुआ. हिंदी में एम.ए. करने के पहले ही से वह पत्रकारिता में आ गए।

वर्ष 1978 से पत्रकारिता. उनके उपन्यास और कहानियों आदि की कोई 22 पुस्तकें प्रकाशित हैं. ''लोक कवि अब गाते नहीं'' पर उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान का प्रेमचंद सम्मान तथा कहानी संग्रह 'एक जीनियस की विवादास्पद मौत' पर यशपाल

दयानंद पांडेय

दयानंद पांडेय

सम्मान। 'लोक कवि अब गाते नहीं' का भोजपुरी अनुवाद डा. ओम प्रकाश सिंह द्वारा अंजोरिया पर प्रकाशित। 'बड़की दी का यक्ष प्रश्न' का अंगरेजी में, 'बर्फ़ में फंसी मछली' का पंजाबी में और 'मन्ना जल्दी आना' का उर्दू में अनुवाद प्रकाशित।

'बांसगांव की मुनमुन', 'वे जो हारे हुए', 'हारमोनियम के हज़ार टुकड़े', 'लोक कवि अब गाते नहीं', 'अपने-अपने युद्ध', 'दरकते दरवाज़े', 'जाने-अनजाने पुल' (उपन्यास), 11 प्रतिनिधि कहानियां, 'बर्फ़ में फंसी मछली', 'सुमि का स्पेस', 'एक जीनियस की विवादास्पद मौत', 'सुंदर लड़कियों वाला शहर', 'बड़की दी का यक्ष प्रश्न', 'संवाद' (कहानी संग्रह), कुछ मुलाकातें, कुछ बातें [सिनेमा, साहित्य, संगीत और कला क्षेत्र के लोगों के इंटरव्यू] यादों का मधुबन (संस्मरण), 'मीडिया तो अब काले धन की गोद में' [लेखों का संग्रह], एक जनांदोलन के गर्भपात की त्रासदी [ राजनीतिक लेखों का संग्रह], सूरज का शिकारी (बच्चों की कहानियां), प्रेमचंद व्यक्तित्व और रचना दृष्टि (संपादित) तथा सुनील गावस्कर की प्रसिद्ध किताब 'माई आइडल्स' का हिंदी अनुवाद 'मेरे प्रिय खिलाड़ी' नाम से तथा पॉलिन कोलर की 'आई वाज़ हिटलर्स मेड' के हिंदी अनुवाद 'मैं हिटलर की दासी थी' का संपादन प्रकाशित।

दयानंद के पांच उपन्यासों का प्रकाशन भड़ास पर भी किया जा चुका है. 

दयानंद पांडेय को 'भड़ास विशिष्ट सम्मान 2013' के लिए चुनकर भड़ास ने कलम के जरिए साहित्य व पत्रकारिता में सच्चाई के पक्ष में अलख जगाने वाली और बेखौफ तरीके से बात रखने वाली समृद्ध भारतीय पत्रकारिता परंपरा को सलाम किया है. दयानंद पांडेय के पाठकों और प्रशंसकों का एक बड़ा समूह है. भड़ास पर दयानंद पांडेय लंबे समय से सक्रिय हैं. चाहें प्रभाष जोशी पर लिखा गया उनका लंबा आर्टिकल हो या राजीव शुक्ला के बारे में जानकारी देता हुआ उनका विश्लेषण, हर एक को बहुत पढ़ा गया और इसके लिए देश भर से दयानंद पांडेय को शाबासी मिली.

जिंदगी के कई हादसों में बहुत कुछ खोने वाले दयानंद पांडेय के जीवन का मकसद सिर्फ सच बोलना, सच ही लिखना और सच पढ़ते रहना है. इसी के जरिए उन्होंने पत्रकारिता में वो सम्मान व उंचाई हासिल की है, जिसके लिए आदर्शवादी और सरोकारी युवक पत्रकारिता में आते हैं. आज दंदफंद और मार्केटिंग के दौर में मसिजीवी होना बेकार की बात माना जाने लगा है लेकिन दयानंद पांडेय ने कलम के जरिए साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में पताका फहरा कर यह संदेश दिया है कि जमाना चाहे जितना बदल जाए, सच्चा लेखक और सच्चा पत्रकार हमेशा समाज को सही बात, सही मार्ग बताता दिखाता रहेगा. दयानंद पांडेय को दिल्ली में 17 मई को भड़ास द्वारा आयोजित जलसे में सम्मानित किया जाएगा.  

दयानंद पांडेय से संपर्क 09335233424 और 09415130127 के जरिए किया जा सकता है. मेल के जरिए [email protected] और [email protected] से उन तक पहंचा जा सकता है. इनके ब्लाग का नाम सरोकारनामा (sarokarnama.blogspot.in) है.


दयानंद पांडेय का भड़ास पर लिखा हुआ पढ़ने के लिए नीचे दिए गए शीर्षकों पर क्लिक करें…

भड़ास पर दनपा (एक)

भड़ास पर दनपा (दो)

भड़ास पर दनपा (तीन)

भड़ास पर दनपा (चार)


भड़ास पर दयानंद पांडेय के सर्वाधिक पढ़े गए टाप ट्वेल्व आर्टिकल ….

1-बीमार अदम गोंडवी और फासिस्ट हिंदी लेखक : एक ट्रेजडी कथा
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2-कोई बलात्कारी नहीं हैं नारायणदत्त तिवारी, साझी धरोहर हैं हमारी
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3-मौकापरस्ती, धोखा और बेशर्मी जैसे शब्द भी राजीव शुक्ला से शर्मा जाएंगे
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4-जीते जी मर जाना और करियर का मर जाना
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5-गिरहकट चला रहे मीडिया, मेधावी भर रहे पानी
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6-का बे तुम्हीं वह प्रेस वाला है?
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7-खबरें बेचने की शुरुआत नरेंद्र मोहन ने की थी
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8-जब जिसकी सत्ता तब तिसके अखबार
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9-हमन इश्क मस्ताना बहुतेरे (प्रभाष जोशी पर)
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10-हजारी प्रसाद द्विवेदी ने जब एक लड़की से करुण रस के बारे में पूछा तो वह रो पड़ी
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11- आप जानते होंगे यशवंत की गुंडई को, पर हम आपकी भडुवई को भी जानते हैं विनोद कापड़ी!
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12- हिंदी लेखकों और पत्रकारों के साथ घटतौली की अनंत कथा

bhadas award 2013


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