Mukesh Kumar : नवाज़ शरीफ़ की विजय के बाद भारतीय मीडिया ने पाकिस्तान के खिलाफ़ एक जंग सी छेड़ दी है। बदलते हालात को तंग नज़रिए से देखना और किसी एक नुक्ते के लेकर अड़ जाना मीडिया का काम नहीं होना चाहिए। वास्तविकता बताने का मतलब नकारात्मकता फैलाना नहीं होता।
पाकिस्तान के सत्ता समीकरणों को जड़ता के साथ देखना-दिखाना भले ही अंध राष्ट्रवादियों का चहेता बना दे या एंकर अथवा चैनल की लोकप्रियता में इज़ाफ़ा कर दे, मगर ये दो देशों के संबंधों में बेहतरी की हल्की सी भी संभावना पर पानी भी फेर सकता है, क्योंकि मीडिया-युद्ध दोनो देशों के अवाम के पूर्वाग्रहों एवं दुराग्रहों को और भी मज़बूत करेगा।
वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार के फेसबुक वॉल से.






