लखनऊ। दिन 17 मार्च, 2009 को पीलीभीत के डालचंद मोहल्ले में भारतीय जनता पार्टी के युवा प्रत्याशी और मेनका गांधी के पुत्र वरुण गांधी ने जो कुछ भी कहा वो एक लोकतान्त्रिक देश में शर्मनाक ही कहा जायेगा। एक चुनावी सभा में वरुण इतना जोश में आ गए की भाषण भूल कर आग उगलने लगे उन्होंने कहा, 'अगर कोई हिंदुओं की तरफ उंगली उठाएगा या समझेगा कि हिंदू कमजोर हैं और उनका कोई नेता नहीं हैं, अगर कोई सोचता है कि ये नेता वोटों के लिए उनके जूते चाटेंगे तो मैं गीता की कसम खाकर कहता हूं कि मैं उस हाथ को काट डालूंगा।'
वरुण ने कहा, 'जो हाथ हिंदुओं पर उठेगा, मैं उस हाथ को काट दूंगा।' वरुण यहीं नहीं रुके। उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को भी नहीं बख्शा। उन्होंने कहा कि गांधीजी कहा करते थे कि कोई इस गाल पर थप्पड़ मारे तो उसके सामने दूसरा गाल कर दो मैंने इससे ज्यादा बेवकूफी की बात नहीं सुनी। अगर आपको कोई एक गाल पर थप्पड़ मारे तो आप उसका हाथ काट दो ताकि आगे से वह किसी को थप्पड़ न मार सके।
इस मामले में चुनाव आयोग ने जहाँ वरुण को नोटिस जारी किया था वहीँ उनके खिलाफ आपराधिक मामला भी दर्ज हुआ था। उसूलन तो वरुण के खिलाफ मामला चलना चाहिए था और उनको सजा मिलनी चाहिए थी लेकिन अब ऐसा कुछ भी नहीं होगा। सूत्रों के मुताबिक मुसलमानों के स्वघोषित रहनुमा समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के बेटे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक डील के तहत वरुण पर अपनी कृपा बरसा दी है। इसी डील का असर हुआ है की 4 वर्ष पहले दर्ज हुए केस में वरुण बाइज्जत बरी हो गए। पीलीभीत के तत्कालीन जिलाधिकारी महेंद्र अग्रवाल ने स्वयं वरुण के खिलाफ मामला दर्ज करवाया, वहीं जिलाधिकारी कोर्ट में अपनी ही बात से मुकर गया। जिलाधिकारी के बाद 14 अन्य सरकारी कर्मचारी भी अपनी गवाही से पलट गए। अग्रवाल ने अपनी रिपोर्ट में लिखा भी कि वरुण हिंदुओं को एकजुट कर मुसलमानों के खिलाफ भड़का रहे हैं। जिसकी सीडी भी तैयार कर ली गई है।
पीलीभीत कोतवाली में वरुण गांधी के खिलाफ 153ए, 295 ए, 505 (2) और 125 लोक प्रतिनिधित्व एक्ट की धारा में मुकदमा दर्ज करा दिया। मुकदमा दर्ज होते ही मायावती सरकार ने वरुण गांधी को ना सिर्फ गिरफ्तार किया बल्कि रासुका भी लग गई। लेकिन बसपा सरकार को सत्ता से बेदखल कर प्रदेश की सत्ता सँभालने वाले अखिलेश यादव ने सब कुछ पलट दिया। पटकथा कहीं और लिखी गयी लेकिन उसकी गवाह बनी पीलीभीत की सीजेएम कोर्ट जहाँ वरुण के खिलाफ कोई गवाह खड़ा ही नहीं हुआ नतीजे में सीजेएम अब्दुल कयूम ने आदेश दिया कि उपरोक्त विवेचना के आधार पर मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूं कि अभियुक्त वरुण गांधी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को अभियोजन पक्ष साबित कर पाने में असफल रहा लिहाजा आरोपी दोषमुक्त किए जाने योग्य हैं।
सूत्र कहते हैं कि ये उसी परदे के पीछे की डील का नतीजा है की पूर्व जिलाधिकारी महेंद्र अग्रवाल कोर्ट में इस बात से मुकर गए कि उन्होंने वरुण के खिलाफ कोई मुकदमा लिखवाया था। एडीएम जमीर आलम ने कोर्ट में कहा कि उन्होंने न तो वरुण गांधी की कोई सभा देखी या सुनी और न ही उनसे कोई शिकायत की गई थी। अब ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि आखिर मुसलमानों की रहनुमाई की बात करने वाली सपा ने समय रहते क्यों उच्च अदालत में मामले को क्यों नहीं उठाया। क्या वाकई में ये राजनैतिक पार्टियाँ दिखावे में एक दुसरे से विरोध करती हैं। क्या लोकसभा चुनाव को लेकर मुलायम और बीजेपी में कोई डील हो गयी है। आखिर कैसे जिलाधिकारी सहित कई सरकारी कर्मचारी अपने बयान बदल सकते हैं। क्या आपको नहीं लगता अखिलेश जी ये गलत हुआ है|





