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मोदी व कांग्रेस के बीच और तेज होगी सियासी जंग

कर्नाटक चुनाव के बाद कांग्रेस नेतृत्व के हौसले एकदम बढ़ गए हैं। इसी के चलते कांग्रेस नेतृत्व अब बचाव की जगह आक्रामक मुद्रा में आता जा रहा है। खासतौर पर भाजपा के चर्चित नेता नरेंद्र मोदी को लेकर कांग्रेस ने जमकर निशाने साधने के संकेत दे दिए हैं। मोदी भी लगातार मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार को कोसने का कोई मौका नहीं चूकते। पलटवार करते हुए केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने कह दिया है कि वे एक सप्ताह के भीतर मोदी के मामले में बड़ा खुलासा कर देंगे।

कर्नाटक चुनाव के बाद कांग्रेस नेतृत्व के हौसले एकदम बढ़ गए हैं। इसी के चलते कांग्रेस नेतृत्व अब बचाव की जगह आक्रामक मुद्रा में आता जा रहा है। खासतौर पर भाजपा के चर्चित नेता नरेंद्र मोदी को लेकर कांग्रेस ने जमकर निशाने साधने के संकेत दे दिए हैं। मोदी भी लगातार मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार को कोसने का कोई मौका नहीं चूकते। पलटवार करते हुए केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने कह दिया है कि वे एक सप्ताह के भीतर मोदी के मामले में बड़ा खुलासा कर देंगे।

संकेत यही हैं कि यह खुलासा गुजरात दंगों के मामले से जुड़ा होगा। सिब्बल ने कहा है कि दंगों के मामले में मोदी को बचाने के लिए गुजरात सरकार के एक आलाधिकारी ने दस्तावेजों में काफी हेरफेर कराए थे। यहां तक कि राज्य के मुख्य सचिव ने खुलकर मोदी को बचाने के लिए तमाम खेल किया था। जल्द ही पुख्ता प्रमाणों के साथ वे मोदी की पोल खोल देंगे। कोशिश की जा रही है कि एक बार फिर कांग्रेस बनाम भाजपा का राजनीतिक फोकस मोदी के मुद्दे पर आकर टिक जाए।

कर्नाटक विधानसभा के चुनाव में भाजपा की करारी हार से मोदी की राजनीतिक क्षमता पर सवाल उठ खड़े हुए हैं। उल्लेखनीय है कि इस चुनाव के प्रचार अभियान में भाजपा की तरफ से ‘सुपरस्टार’ की हैसियत से नरेंद्र मोदी को भेजा गया था। बंगलुरु सहित कई चुनाव क्षेत्रों में मोदी ने कांग्रेस के खिलाफ जमकर हुंकार लगाई थी। राष्ट्रीय मुद्दों का जिक्र करते हुए उन्होंने कर्नाटक की जनता से कांग्रेस को सबक सिखाने की अपील की थी। मोदी सहित भाजपा के तमाम बड़े नेताओं की चुनावी हुंकार के बाद भी यहां पार्टी बुरी तरह से पस्त हुई है। जबकि, 224 में से कांग्रेस 121 सीटें पाकर पूरा बहुमत हासिल करने में सफल रही। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या अपने गृहराज्य गुजरात के बाहर मोदी की राजनीतिक अपील कोई मायने रखती है या नहीं? यह बात खास तौर पर इसलिए कही जा रही है क्योंकि, पिछले साल हिमाचल और उत्तराखंड के चुनावों में भी भाजपा ने करारी मात खाई थी। इन दोनों प्रदेशों में भाजपा को चुनाव जिताने के लिए मोदी ने दौरे किए थे। लेकिन, दोनों राज्यों में भाजपा के हाथ से सत्ता कांग्रेस के पाले में गई। यही स्थिति कर्नाटक में भी दोहराई गई।

कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह कहते हैं कि अब तो भाजपा वालों को यह समझ में आ जाना चाहिए कि नरेंद्र मोदी की गुजरात से बाहर कोई पहचान नहीं है। गुजरात से बाहर उनकी छवि महज दंगा-फसाद कराने वाले नेता की है। लेकिन, इस पार्टी के लोग मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने पर जुटे हैं। कांग्रेस महासचिव का आरोप है कि मोदी तमाम अर्ध सत्यों के जरिए कई मुद्दों पर राजनीतिक झांसा देने की राजनीति ही करते आए हैं। लेकिन, गुजरात के बाहर उनकी यह नीति कामयाब नहीं हो सकती।

पिछले कई महीनों से प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी को लेकर संघ परिवार में मोदी का नाम जमकर उछाला जा रहा है। भाजपा की एक बड़ी लॉबी भी इस मुद्दे पर उनके पक्ष में मुहिम चलाने लगी है। इस मामले को लेकर एनडीए का बड़ा घटक जदयू नाराज भी है। इस दल के वरिष्ठ नेता एवं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार साफ-साफ कह चुके हैं कि यदि भाजपा ने प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार रूप में नरेंद्र मोदी का नाम प्रोजेक्ट किया, तो उनकी पार्टी एनडीए गठबंधन से नाता तोड़ लेगी। चूंकि, जदयू सेक्यूलर राजनीति की बात करके अपने मुस्लिम वोट  बैंक को भी अपने पाले में रखना चाहती है। ऐसे में, मोदी को लेकर उसने अपना दो टूक स्टैंड तय कर लिया है। जदयू की इस टेक के चलते भाजपा के अंदर मोदी के मुद्दे पर कोई फैसला नहीं हो पा रहा है।

भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह यह बात कई बार दोहरा चुके हैं कि पीएम उम्मीदवारी का फैसला संसदीय बोर्ड करेगा। इसलिए भाजपा के अंदर इस मुद्दे पर ज्यादा विवाद नहीं खड़ा किया जाना चाहिए। राजनाथ सिंह की इस नसीहत के बावजूद पार्टी के कुछ बड़े नेता मोदी की पैरवी में कुछ न कुछ बोलकर विवाद बढ़ा देते हैं। पार्टी ने भले इस मुद्दे पर कोई फैसला नहीं किया हो, लेकिन, नरेंद्र मोदी खुद अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं छिपा नहीं पा रहे हैं। पहले वे गुजरात में हुए अपने कार्यकाल की विकास की दुहाई देते घूमते रहते थे। लेकिन, अब वे   बात-बात पर केंद्र सरकार और कांग्रेस को कोसते नजर आते हैं। उनका राजनीतिक एजेंडा गुजरात के बजाए पूरे देश का हो गया है। वे कह भी चुके हैं कि पिछले 12 वर्षों में सत्ता के दौरान गुजरात की धरती का कर्ज तो उन्होंने उतार दिया है, अब समय आ गया है कि देश की सेवा करके उसका कर्ज भी उतार दूं। उनके इस बहुचर्चित जुमले का आशय यही समझा गया कि मोदी खुद को प्रधानमंत्री पद का भावी उम्मीदवार मानकर चल रहे हैं।
भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह सहित पार्टी के और कई बड़े नेता लगातार यही कह रहे हैं कि मोदी सबसे ज्यादा लोकप्रिय नेता हैं। पार्टी अध्यक्ष यह भी कह चुके हैं कि राष्ट्रीय राजनीति में निश्चित तौर पर उनकी बड़ी भूमिका रहेगी। इस तरह की टिप्पणियां करके वे मोदी के पक्ष में लगातार संकेत दे रहे हैं। इससे मोदी और उनकी टोली जमकर उत्साहित भी हैं। पार्टी के रणनीतिकारों का आकलन यही है कि मोदी को प्रोजेक्ट करने से भाजपा बड़े पैमाने पर वोटों का सामाजिक ध्रुवीकरण करने में सफल हो सकती है। चूंकि मोदी, कांग्रेस और केंद्र सरकार पर बहुत आक्रामक ढंग से प्रहार करते हैं, ऐसे में कांग्रेस के विरोध में सियासी ध्रवीकरण होने की ज्यादा उम्मीद भी की जा सकती है।

‘गुजरात दिवस’ के अवसर पर मोदी ने अमेरिका में रहने वाले प्रवासी भारतीयों को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सोमवार को संबोधित किया। अमेरिका के 20 शहरों में एक साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सभाओं को मोदी ने संबोधित किया। करीब 1 घंटे के भाषण में मोदी ने कई मुद्दों पर मनमोहन सरकार को जमकर लताड़ा। खासतौर पर विदेश नीति पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि पड़ोसी मुल्क (पाकिस्तान) के सैनिक हमारे जवानों के सिर काट कर ले जाते हैं। इस बर्बर कारनामे के बाद भी हमारी सरकार वहां के प्रधानमंत्री की निजी यात्रा के समय भी पलक-पांवड़े बिछाने पर उतारू रहती है। विदेश मंत्री, उन्हें बिरयानी का भोज देने पहुंच जाते हैं। जाहिर है इस कार्यशैली से फौज का कहीं न कहीं मनोबल जरूर कमजोर होता होगा। मोदी ने भारत-चीन के बीच हुए ताजा विवाद का भी जिक्र किया। कह दिया कि 20 दिनों बाद चीन सेना के घुसपैठिए किसी तरह वापस तो लौट गए हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि हमारी सेना अपनी ही सीमा में कई किलोमीटर पीछे क्यों लौट आई? आखिर यह कौन-सी रणनीति है? मोदी ने इस मुद्दे पर सरकार की रणनीति पर तीखे कटाक्ष कर डाले।

गुजरात के मुख्यमंत्री ने अपने राज्य के विकास के आंकड़े बताते हुए खूब शाबासी दे डाली। यहां तक कहा कि गुजरात के विकास मॉडल को इतिहास हमेशा याद रखेगा। क्योंकि, केंद्र के सौतेले व्यवहार के बावजूद राज्य में विकास के नए रिकॉर्ड बने हैं। उन्होंने कहा कि इस समय केंद्र की लचर और कमजोर सरकार की वजह से देश का आत्मविश्वास पूरी तरह से हिल गया है। यह सबसे खतरनाक स्थिति है। इसलिए जरूरी हो गया है कि यह कमजोर और लाचार सरकार जल्द से जल्द विदा हो जाए। केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल कह चुके हैं कि मोदी, अपने राज्य के विकास के तमाम दावे गलत ढंग से पेश करते हैं। वे कहते हैं कि राज्य में कृषि का रिकॉर्ड उत्पादन हो रहा है। जबकि, सच्चाई यह है कि पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, आंध्र प्रदेश व महाराष्ट्र जैसे प्रदेशों के मुकाबले गुजरात का कृषि उत्पादन बहुत कम है। यहां का तमाम विकास कांग्रेस के दौर में ही हुआ था। ऐसे में, मोदी विकास को लेकर लफ्फाजी ज्यादा करते हैं।

सिब्बल, मोदी के विकास को ‘बिग-0’ करार करते हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं कांग्रेसी नेता सुबोधकांत सहाय ने कह दिया है कि नरेंद्र मोदी और कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी की तुलना नहीं की जानी चाहिए। राहुल गांधी की राजनीतिक अपील काफी ज्यादा है। जबकि, गुजरात के बाहर, मोदी जहां-जहां पैर रखते हैं, वहां भाजपा का चुनावी बाजा बज जाता है। कपिल सिब्बल ने कल ही कानून मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार औपचारिक रूप से संभाल लिया है। प्रभार संभालते ही उन्होंने मोदी की पोल खोलने का दावा कर दिया। यहां राजनीतिक हल्कों में माना जा रहा है कि कांग्रेस नियोजित रणनीति के तहत राजनीतिक फोकस मोदी बनाम कांग्रेस कराने की कोशिश कर रही है।

लेखक वीरेंद्र सेंगर डीएलए (दिल्ली) के संपादक हैं। इनसे संपर्क [email protected] के जरिए किया जा सकता है।

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