चुनावों से कुछ माह पहले राजस्थान विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष और पूर्व गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया एक बड़े झमेले में फंस गए हैं। आठ साल पुराने गुजरात के सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ कांड में सीबीआई ने कटारिया को हत्या की साजिश के आरोप में नामजद करते हुए अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। चार्जशीट में लगाए गए आरोप इतने गंभीर हैं कि कटारिया का जेल जाना लगभग तय है। गुजरात के तत्कालीन गृह मंत्री अमित शाह इस कांड के मुख्य आरोपी हैं और इसी के चलते उनकी कुर्सी गई थी। फिलहाल वे जमानत पर हैं।
सोहराबुद्दीन शेख एक माफिया सरगना था। अक्टूबर-नवंबर 2004 में अजमेर के आरके मार्बल समूह के मालिक और भीलवाड़ा की संगम टैक्सटाइल के मालिकों को फोन पर धमकी देते हुए 24 करोड़ रुपए की रंगदारी मांगी थी। दोनों समूहों ने तत्कालीन गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया और पुलिस के आला अफसरों से संपर्क किया। कटारिया आदि ने सोहराबुद्दीन को रास्ते से हटाने के लिए गुजरात के गृह राज्य मंत्री अमित शाह से संपर्क किया।
26 नवंबर 2005 को गुजरात और राजस्थान की संयुक्त टीम ने अहमदाबाद के नरोडा के पास एक फर्जी मुठभेड़ में सोहराबुद्दीन को मार गिराया। कुछ दिनों बाद सोहराबुद्दीन की पत्नी कौसरबी की भी हत्या कर दी गई। दिसंबर 2006 में इस कांड के चश्मदीद गवाह और सोहराबुद्दीन के साथी तुलसी प्रजापति का उदयपुर जेल से गुजरात ले जाते समय एनकाउंटर कर दिया गया। सन 2007 में इस कांड की गूंज गुजरात विधानसभा में सुनाई दी। राजस्थान और गुजरात पुलिस की जांच के बाद यह मामला सीबीआई के पास चला गया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से सोहराबुद्दीन और तुलसी प्रजापति फर्जी एनकाउंटर मामलों की सुनवाई मुंबई के कालाघोड़ा में विशेष रूप से गठित सीबीआई अदालत में चल रही है।
इस कांड के चलते अमित शाह का इस्तीफा हुआ और नरेंद्र मोदी तथा भाजपा के तत्कालीन गुजरात महामंत्री ओम प्रकाश माथुर के दामन पर भी छींटे लगे थे। राजस्थान और गुजरात के 5 आईपीएस अधिकारियों समेत अब तक इस मामले में 18 के खिलाफ चार्जशीट दायर हो चुकी है। इनमें गुजरात के डीआईजी बंजारा, उदयपुर के एसपी दिनेश एमएन, आंध्र प्रदेश के आईजी एन बालासुब्रहम्ण्यम शामिल हैं। कटारिया के साथ आरके मार्बल के डायरेक्टर विमल पाटनी को भी अभियुक्त बनाया गया है।
कटारिया के दिनमान : उदयपुर के पूर्व सांसद गुलाबचंद कटारिया राज्य में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ लॉबी के नेता हैं। उदयपुर की पूर्व सांसद और भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय महामंत्री किरण माहेश्वरी को वे ही राजनीति में लाए थे। वसुंधरा राजे से उनका छत्तीस का आंकड़ा है। भाजपा सत्ता के पांच और विपक्ष के चार सालों तक उनकी कभी वसुंधरा से नहीं बनी। वे आगामी चुनावों के बाद राज्य का मुख्यमंत्री होने की आस जोह रहे थे और इन्हीं तैयारियों के चलते मेवाड़ क्षेत्र में अपनी जनसंपर्क यात्रा निकालना चाहते थे। वसुंधरा की शह पर किरण माहेश्वरी ने इसका जमकर विरोध किया। मामला दिल्ली तक पहुंचा और भाजपा के तत्कालीन अध्यक्ष नितिन गडकरी ने यात्रा पर रोक लगा दी। वसुंधरा अपनी शर्तों पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनीं और नेता प्रतिपक्ष पद छोड़ दिया। कटारिया समेत भाजपा के करीब आठ बड़े नेताओं ने गंगाजल लेकर कसम खाई कि वसुंधरा का साथ नहीं देंगे और मिलकर लड़ाई लडेंगे। कटारिया का वसुंधरा से समझौता हो गया और वे नेता प्रतिपक्ष बन गए। वसुंधरा उन्हें अपनी सुराज संकल्प यात्रा में साथ लेकर चल रही है। कटारिया दोस्तों के बुरे बन चुके हैं। मुख्यमंत्री की उम्मीद तो रही नहीं किसी नई कुर्सी की तलाश में थे। अब चुनाव का क्या होगा, पता नहीं हो सकता है चुनाव के समय वे सींखचों के पीछे नजर आएं।
कांग्रेस का खेल : भाजपा इसे कांग्रेस की साजिश बता रही है और पुराने मामलों में भाजपा नेताओं को सीबीआई के जरिए फंसाने के कुचक्र का आरोप लगा रही है। इससे पहले दारिया फर्जी एनकाउंटर मामले में वसुंधरा के दाएं हाथ माने जाने
वाले पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह राठौड़ भी गिरफ्तार हो चुके हैं।
अजमेर से राजेंद्र हाड़ा की रिपोर्ट. राजेंद्र जी से संपर्क 09549155160 या 09829270160 या [email protected] के जरिए कर सकते हैं. राजेंद्र हाड़ा करीब दो दशक तक सक्रिय पत्रकारिता में रहे. अब पूर्णकालिक वकील हैं. यदा-कदा लेखन भी करते हैं. लॉ और जर्नलिज्म के स्टूडेंट्स को पढ़ा भी रहे हैं.





