गरीब नवाज ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के उर्स में इस दफा पाक जायरीन का जत्था नहीं आएगा। भारतीय सैनिकों के सिर काट ले जाने और सरबजीत सिंह की जेल में हत्या को लेकर अजमेर में कुछ हिन्दुवादी संगठनों के विरोध के चलते भारत सरकार ने पाक जायरीन को भारत आने की अनुमति नहीं दी है।
हर उर्स में पाकिस्तान से करीब सौ सवा सौ पुरुष जायरीन भारत सरकार के खास मेहमान बनकर जियारत के लिए अजमेर आते हैं। अटारी से उनके लिए स्पेशल ट्रेन चलती है जो आईबी और विशेष सुरक्षा बलों की निगरानी में दिल्ली होते हुए अजमेर आती है। यहां अमूमन वे तीन-चार दिन ठहरते हैं तब तक ट्रेन विशेष सुरक्षा निगरानी में रहती है। उन्हें एक सरकारी स्कूल में ठहराया जाता है। कलेक्टर समेत राज्य के कई अफसर उनकी तीमारदारी में रहते हैं। यह और बात है कि वे नियम तोड़ने में चूक नहीं करते और जत्थे में से एकाध पाक नागरिक वीजा का उल्लंघन करते हुए कहीं और घूमने चल देता है। अजमेर नगर निगम और नगर विकास न्यास उनके सम्मान में भोज देता है और अभिनंदन करता है।
भारत सरकार इस साल भी उनकी ऐसी ही मेहमान नवाजी के लिए पलक पांवडे़ बिछाए बैठी थी परंतु अजमेर के कुछ हिन्दुवादी संगठनों ने सरबजीत सिंह की हत्या और भारतीय सैनिकों के सिर काट ले जाने के मुद्दे को उठाते हुए पाक जायरीन के आने पर उनके विरोध का ऐलान किया। शहर में जगह-जगह हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। प्रशासन ने एक और तो उनके लिए सारी तैयारियां कर ली दूसरी ओर अपने मंत्रियों-अफसरों के जरिए आंदोलन को खत्म कराने की भी कोशिशें जारी रखी। अंततः सुरक्षा कारणों की आड़ लेकर पाकिस्तान को जायरीन नहीं भेजने का निर्णय सुना दिया।
हालांकि भारत सरकार के इस फैसले को लेकर दरगाह से जुडे़ कुछ लोग और बांग्लादेश से आए जायरीन इत्तेफाक नहीं रखते। उनका कहना है कि यह ख्वाजा का दरबार है, यहां आने से किसी को रोका जाना ठीक नहीं है। उनके मुताबिक
सियासत को धर्म से अलग रखा जाना चाहिए। उनकी समझ में संभवत: सरबजीत और भारतीय सैनिकों का मुद्दा शहादत नहीं सियासत है।
अजमेर से राजेंद्र हाड़ा की रिपोर्ट. राजेंद्र जी से संपर्क 09549155160 या 09829270160 या [email protected] के जरिए कर सकते हैं. राजेंद्र हाड़ा करीब दो दशक तक सक्रिय पत्रकारिता में रहे. अब पूर्णकालिक वकील हैं. यदा-कदा लेखन भी करते हैं. लॉ और जर्नलिज्म के स्टूडेंट्स को पढ़ा भी रहे हैं.





