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रेणुकूट में दैनिक जागरण और अमर उजाला के पत्रकारों ने कलम रख दी गिरवी

रेणुकूट : लगातार बहस का मुद्दा बनती जा रही पत्रकारिता की साख के लिए वास्तव में कुछ पत्रकारों की भूमिका को देखते हुए कुछ भी कहना अब बहुत खराब नहीं लगता है। सोनभद्र के रेणुकूट में पत्रकारिता से खिलवाड़ करने वाले दो तथाकथित बड़े कहे जाने वाले अखबारों के पत्रकारों ने तो कम से कम यही साबित किया है। अमर उजाला के पत्रकार रामाश्रय राय एवं दैनिक जागरण के राहुल शर्मा रेणुकूट में द्वेषपूर्ण एवं धनोपार्जन की पत्रकारिता के लिए प्रसिद्ध होते जा रहे हैं।

रेणुकूट : लगातार बहस का मुद्दा बनती जा रही पत्रकारिता की साख के लिए वास्तव में कुछ पत्रकारों की भूमिका को देखते हुए कुछ भी कहना अब बहुत खराब नहीं लगता है। सोनभद्र के रेणुकूट में पत्रकारिता से खिलवाड़ करने वाले दो तथाकथित बड़े कहे जाने वाले अखबारों के पत्रकारों ने तो कम से कम यही साबित किया है। अमर उजाला के पत्रकार रामाश्रय राय एवं दैनिक जागरण के राहुल शर्मा रेणुकूट में द्वेषपूर्ण एवं धनोपार्जन की पत्रकारिता के लिए प्रसिद्ध होते जा रहे हैं।

बीते 9 मई को रेणुकूट के पिपरी स्थित बिजली विभाग के एक जेई सतीश सिंह को रेणुकूट नगर पंचायत अध्यक्ष के भाई बृजेश सिंह ने सरेआम धुन दिया। जेई द्वारा इसकी शिकायत पिपरी थाने में करते हुए तहरीर दी गई। पुलिस ने बृजेश सिंह के ऊपर मुकदमा भी दर्ज कर लिया, खूब बवाल भी मचा। बिजली विभाग के कर्मचारी युनियनों ने आन्दोलन की धमकी तक दे डाली, परन्तु दैनिक जागरण एवं अमर उजाला के पत्रकारों को बडे़-बड़े विज्ञापनों के आगे कुछ भी नहीं दिखा, लिहाजा दोनों बड़े कहलाने वाले अखबारों से यह पूरी खबर ही नदारद रही।

जनमानस की आलोचनाओं के बाद अमर उजाला के पत्रकार ने तो फालोअप के नाम पर दो दिन बाद खबर लिखी, पर नमक हलाली का परिचय देते हुए आरोपी का बचाव भी पूरा किया। मुकदमा दर्ज होने के बाद भी आरोपी के नाम की जगह एक युवक लिख दिया। वहीं दैनिक जागरण के पत्रकार राहुल शर्मा की वफादारी तनिक भी नहीं डगमगाई और खबर ना लगाने की कसम ही खा बैठे। लोगों में इन अखबारों के पत्रकारों के इस रवैये के प्रति काफी रोष है। वैसे इन पत्रकारों के बारे में कहा जाता है कि अगर इनके सामने से कोई कुत्ता भी जोर से दुम हिलाता निकल जाये तो भी ये गुस्ताखी बर्दाश्‍त नहीं करते और लीड खबर बन जाती है।

इतना ही नहीं पुलिस ने आरोपी बृजेश सिंह को अरेस्‍ट भी कर लिया परन्‍तु दैनिक जागरण ने खबर ही नहीं प्रकाशित की, जबकि अमर उजाला ने छोटी सी खबर में निपटा दिया। ऐसे में जनमानस द्वारा पत्रकार एवं पत्रकारिता की भूमिका पर उठाए जाने वाले सवाल कम से कम बेमतलब तो नहीं ही लगते हैं। क्‍या अखबार के आला हुक्मरानों को ऐसे पत्रकारों से तौबा कर लेना चाहिए जो पत्रकारिता के वास्तविक मूल्यों के सृजन से परे अपना धन्धा एवं धनोपार्जन कर पत्रकारिता की साख एवं लोगों के विश्‍वास पर बट्टा लगा रहे हैं। ऐसे ही पत्रकारों की वजह से ही पत्रकारिता के मूल्यों की बात तो दूर अखबारों के परिपेक्ष्य में निष्‍पक्षता, निर्भीकता, सत्यनिष्‍ठा जैसे शब्द व्यावहारिकता में भी नदारत होते जा रहे हैं।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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