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इन मुसीबतों से डरकर कभी यशवंत ने अपने कदम पीछे खींचे हो, ऐसा नहीं हुआ…

: भड़ास४मीडिया मतलब पोलखोल अभियान के पाँच साल : मीडिया जगत की काली सच्चाई को उजागर करने के लिए एक जुझारू पत्रकार के द्वारा चलाये जा रहे पोलखोल अभियान का एक और साल पूरा हो गया| वो पत्रकार जिसे खुद को दबंग और रंगबाज कहने-कहलवाने से कोई गुरेज नहीं, जो न किसी से डरता है न दबता है, हर मुसीबत के सामने डटकर खड़ा होना आता है जिसे| बात हो रही है खबरियों की खबर देने वाली प्रमुख वेबसाईट भड़ास४मीडिया के संस्थापक यशवंत सिंह की|

: भड़ास४मीडिया मतलब पोलखोल अभियान के पाँच साल : मीडिया जगत की काली सच्चाई को उजागर करने के लिए एक जुझारू पत्रकार के द्वारा चलाये जा रहे पोलखोल अभियान का एक और साल पूरा हो गया| वो पत्रकार जिसे खुद को दबंग और रंगबाज कहने-कहलवाने से कोई गुरेज नहीं, जो न किसी से डरता है न दबता है, हर मुसीबत के सामने डटकर खड़ा होना आता है जिसे| बात हो रही है खबरियों की खबर देने वाली प्रमुख वेबसाईट भड़ास४मीडिया के संस्थापक यशवंत सिंह की|

यशवंत सिंह जिसके नाम का खौफ तो तमाम तथाकथित मीडिया हाउसों के मालिकों व मैनेजमेंट में है। और हो भी क्यों न, खुद को कॉरपोरेट कहने वाले इन सफेदपोशों की दुकानों के अंदर की काली सच्चाई को यशवंत दुनिया के सामने जो लाते आये हैं। न रुपयों से इन्हें खरीदा जा सका और न ही धमकियों से डराया जा सका। यशवंत तो बस अपनी ही धुन में प्रबंधन के सताए कमजोर पत्रकारों का एक मजबूत सहारा बनकर हमेशा उनके साथ खड़े रहे | यशवंत को डराने-दबाने की, भड़ास४मीडिया को बंद कराने के न जाने कितने ही प्रयास किये गये लेकिन यह इंसान अपने मजबूत इरादों के साथ आज भी खड़ा हुआ है, न केवल खड़ा है बल्कि प्रसिद्धि की नयी ऊंचाइयों को भी छू रहा है| दूसरों के दर्द को अपना दर्द समझकर उनकी मदद करने के जज्बे ने यशवंत को कई बार मुसीबतों में भी डाला लेकिन फिर इन मुसीबतों से डरकर कभी यशवंत ने अपने कदम पीछे खींचे हो, ऐसा नहीं हुआ| कानूनी पचड़ों में फँसे, रंगदारी वसूलने के आरोप लगे और इस कारण जेल यात्रा भी करनी पड़ी लेकिन इसके बावजूद न तो इरादे कमजोर पड़े, न हौसला और न ही आत्मविश्वास|

भड़ास४मीडिया के आने से पहले तक विभिन्न मीडियाहाउसों के अंदर चल रही खींचतान-उठापटक की जानकारी कम ही लोगों को हो पाती थी| आंतरिक राजनीति के शिकार बन रहे मीडिया कर्मियों की आवाज कहीं दबकर रह जाती थी लेकिन भड़ास के आने के बाद इन सबका जगजाहिर होना शुरू हुआ| आंतरिक राजनीति, शोषण का शिकार हो रहे मीडियाकर्मियों को एक माध्यम मिला जिससे वह अपनी बात को-अपने दर्द को सबके सामने रख सकें| उन्हें एक ऐसा सशक्त माध्यम मिला जिससे वे भी अपनी ‘भड़ास’ निकाल सकें|

यशवंत ने इमानदारी से लिखते हुए पत्रकारों के हक की आवाज़ तो उठायी ही साथ ही साथ पत्रकारिता पेशे को बदनाम कर रहे पत्रकारों की गलत हरकतों को भी उजागर करने से नहीं चूके| पत्रकारिता जगत में भड़ास की लोकप्रियता के बारे में क्या कहा जाये, पत्रकारिता पेशे से जुड़े देश भर के अधिकाँश लोग भड़ास४मीडिया के नाम से भलीभांति परिचित हैं| शायद यही इकलौती ऐसी वेबसाईट होगी जिसे कई मीडिया संस्थानों ने अपने संस्थान में प्रतिबंधित किया हुआ है और कर्मचारियों को हिदायत मिली हुयी है कि वे संस्थान में इस वेबसाईट को न खोलें| एक सच यह भी है कि विभिन्न मीडिया घरानों के कर्ताधर्ताओं व उच्चप्रबंधन द्वारा भले ही इस वेबसाईट को प्रतिबंधित की श्रेणी में रखा जाता हो लेकिन अपने ही संस्थान में चल रही उठापटक व आंतरिक राजनीति से सम्बंधित ख़बरों को जानने के लिए ये लोग स्वयं भी इसका उपयोग करते हैं, ये एक ऐसा सच है जिसे ये लोग शायद आसानी से कभी स्वीकार नहीं करेंगे| अपनी उपयोगिता के कारण जो लोकप्रियता इन्टरनेट की दुनिया में गूगल ने हासिल की है वही लोकप्रियता भारतीय मीडिया जगत में भड़ास४मीडिया ने| खबरियों की खबर देने वाला भड़ास४मीडिया लोकप्रियता व प्रसिद्धि के नए आयामों को छुए व निष्पक्ष ख़बरों को सामने लाता रहे इन्ही कामनाओं के साथ यशवंत व उनकी टीम को भड़ास४मीडिया की पाँचवी वर्षगाँठ की हार्दिक बधाई एवँ
शुभकामनायें………

शिवम् भारद्वाज

आगरा

[email protected]


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