मध्यम गति से चलने वाली दो पहिये की साईकिल में सवार होकर बंगलुरू के अखबार बेचने वाले एन. शिवा कुमार ने खुली आंखों से एक सपना देखा। सपना था कैट की परीक्षा पास कर कामयाबी की उड़ान भरने का। शिवा के लिए ये एक ऐसी उड़ान थी जिसे वो अकेले ही अपनी हिम्मत और काबलियत के दम पर भरना चाहता था।
क्या अखबार बेचने वाले को आईआईएम में एडमिशन मिल सकता है। जी हां अगर मन में विश्वास और दिल में कुछ करने का जज्बा हो तो हालात कितने ही मुश्किल क्यों न हों, कामयाबी एक दिन कदम चूमती ही है। ये साबित किया है 23 साल के न्यूजपेपर हॉकर एन. शिवा कुमार ने। शिवा अब हर सुबह साइकल पर अखबार रख घरों में डालते नहीं, बल्कि प्रतिष्ठित कोलकाता के बिजनेस स्कूल आईआईएम में एमबीए की पढ़ाई करते नजर आएंगे।
दरअसल शिवा की कामयाबी की यह कहानी दिलचस्प है। शिवा के माता-पिता पढ़े-लिखे नहीं हैं। पिता ट्रक चलाते हैं। चार सदस्यों के उनके परिवार में हमेशा पैसों की तंगी बनी रहती। ऊपर से पिता पर कर्ज का बोझ भी है। घर की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए शिवा ने छठी क्लास से ही न्यूजपेपर हॉकर का काम शुरू किया। इन मुश्किल हालातों में भी कुछ करने का जज्बा शिवा के दिल में था। उन्होंने कामयाबी की पहली सीढ़ी तब चढ़ी जब बांसवाड़ी के बेंगलुरु इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी में उन्हें दाखिला मिला। इसके बाद उन्होंने वो हासिल किया जिसका सपना MBA करने का इच्छुक हर स्टूडेंट देखता है। शिवा ने CAT 2012 में सफलता हासिल कर इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट-कलकत्ता में सीट पक्की की। आगामी 16 जून से शिव कुमार अब इस प्रतिष्ठित बिजनेस स्कूल में पढ़ते नजर आएंगे।





