अमर उजाला, लखनऊ के कार्यालय में सब कुछ सही नहीं चल रहा है. सूत्रों का कहना है कि चीफ रिपोर्टर राजन परिहार की फटकार के बाद सीनियर रिपोर्टर आलोक पराड़कर पिछले एक महीने से ऑफिस नहीं आ रहे हैं. आलोक राजन के व्यवहार से खासे नाराज हैं. आलोक इसके पहले हिंदुस्तान में भी कार्य कर चुके हैं. सूत्रों का कहना है कि दूसरी तरफ संपादक के रवैये से नाराज नवीन घोषाल भी अवकाश पर चल रहे हैं.
गौरतलब है कि अमर उजाला, लखनऊ में काम करने की परिस्थितियां बहुत ही खराब हैं. यह यूनिट अक्सर विवादों में आता रहता है. अमर उजाला की इंटरनल रेटिंग में भी यह यूनिट सबसे फिसड्डी यूनिट में शामिल रहा है. (कानाफूसी)
अपडेट…
कार्यालय ना जाने से जुडी खबर पर अमर उजाला के वरिष्ठ संवाददाता आलोक पराड़कर ने इसमे 'फटकार' शब्द के प्रयोग पर आपत्ति जताई है। पराड़कर का कहना है कि राजन परिहार उनसे काफी जूनियर हैं। लोकल प्रभारी के तौर पर पिछले दिनों राजन ने उन्हें छुट्टी के दौरान उसे रद्द क्रर वापस आने को कहा था, उस वक़्त मिर्ज़ापुर में अपने एक रिश्तेदार की तेरही में शामिल होने गये पराड़कर के लिए ऐसा कर पाना संभव नहीं था। इसी बात को लेकर छुट्टी से लौटने के बाद दोनों में मीटिंग में बहस हुई और जब परिहार ने बेसिर पैर की बातें शुरू की तो अपने काम में शिकायत का मौका ना देने वाले पराड़कर नाराज़ हो गये। उन्होंने कहा कि अपने २ ३ साल के पत्रकारिता के अनुभव के बाद उन्हें ये बताने की जरुरत नहीं है कि गलत और सही क्या है? इसके बाद वे नाराज़ होकर मीटिंग से चले गये और मेडिकल अवकाश पर हैं। अमर उजाला में आलोक पराड़कर के पास साहित्य-संस्कृति की खबरों के साथ ही साप्ताहिक फीचर के पृष्ठ ड्रीम सिटी की भी जिम्मेदारी रही है।





