दोनों सूचनाएं सच साबित हुईं. भड़ास ने बताया कि नदीम तोड़ने जा रहे हैं दैनिक जागरण से 20 साल पुराना अपना नाता. फिर बताया कि नदीम बन गए हैं नभाटा के असिस्टेंट एडीटर. दोनों बातें सच साबित हुईं. अब जल्द ही आपको भड़ास बतायेगा कि नदीम के जागरण छोड़ने पर वहां शीर्ष स्तर पर किस तरह मची गई जंग? क्यों जागरण छोड़ा नदीम ने? संजय गुप्ता के इस सवाल का जवाब नहीं तलाश पा रहे हैं रामेश्वर पांडे और दिलीप अवस्थी। अपनी अपनी कुर्सी बचाने को किस तरह नदीम को दैनिक जागरण में रोकने की हो रही हैं कोशिश? नदीम न रुके तो क्या दिलीप अवस्थी को हटाया जा सकता है लखनऊ से? दिल्ली की एक लाबी जुट गई है इस मुहिम में….
पूरा विश्लेषण जल्द… बस, पढ़ते रहिए भड़ास…. क्योंकि भड़ास की एक-एक मीडिया संस्थान पर 24×7 रहती है नजर. जो हम कहते हैं, वही होता है सच. कौन कहता था कि नदीम छोड़ देंगे दैनिक जागरण, लखनऊ. दोनों एक दूसरे के पर्याय बन चुके थे. दोनों के दरम्यान विश्वास का हिमालय पर्वत. लेकिन भड़ास ने अगर नदीम के दैनिक जागरण छोड़ने की खबर ब्रेक की तो उसकी वजह बस यही थी कि हम सच्ची बात करते हैं. हम अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं. मीडिया जगत पर हमारी रहती है 24×7 नजर. कुछ भी हमसे बच नहीं सकता… इसलिए पढ़ते रहिए भड़ास….





