Sanjaya Kumar Singh : bhadas4media.com के कार्यक्रम की खासियत यह होती है कि लोग आते-जाते रहते हैं। यानी कार्यक्रम में शामिल लोगों की संख्या हॉल की क्षमता से ज्यादा होती है। मैं पिछले साल यानी चौथी सालगिरह पर भी मौजूद था और तब अपेक्षाकृत छोटे हॉल में मैंने ऐसा महसूस किया था।
इस बार बड़े हॉल में भी यही स्थिति थी। इस एक साल में भड़ास के कार्यक्रम में लोगों की उपस्थिति को प्रगति का पैमाना माना जाए तो मुझे लगता है कि यह पिछले चार साल की कुल प्रगति से ज्यादा रही है और इसका श्रेय अन्य सभी चीजों के साथ निश्चित रूप से यशवंत और अनिल की गिरफ्तारी को जाता है।

आनंद प्रधान का संबोधन ((तस्वीर अविनाश वाचस्पति के फेसबुक वॉल से))
आगे के लिए यशवंत को मेरी भी वही सलाह है जो अनिरुद्ध बहल दी थी। मेनस्ट्रीम मीडिया से अगर कुछ सीखने लायक है तो फिल्टरेशन (सफाई-छंटाई) की उसकी व्यवस्था। इसका उपयोग कायदे से किया जाए तो कई फायदे होंगे। और साख मजबूत करने के लिए मेरे ख्याल से भड़ास को अब इसकी जरूरत भी है।
वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार सिंह के फेसबुक वॉल से.
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