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आवाजाही, कानाफूसी...

गढ़ बचाने खुद लखनऊ पहुंचेगे संजय गुप्ता !

(कानाफूसी) लखनऊ : हालांकि इसकी अभी अधिकृत पुष्टि नहीं हुई है लेकिन जागरण के सूत्र यह खबर दे रहे हैं कि लखनऊ का गढ़ बचाने को दैनिक जागरण के मालिक संजय गुप्ता दो-तीन दिन के अंदर लखनऊ पहुंच रहे हैं। राजनीतिक सम्पादक प्रशांत मिश्र से भी लखनऊ पहुंचने को कहा गया है। एसोसिएट एडीटर पंडित विष्णु प्रकाश त्रिपाठी भी साथ हो सकते हैं।

(कानाफूसी) लखनऊ : हालांकि इसकी अभी अधिकृत पुष्टि नहीं हुई है लेकिन जागरण के सूत्र यह खबर दे रहे हैं कि लखनऊ का गढ़ बचाने को दैनिक जागरण के मालिक संजय गुप्ता दो-तीन दिन के अंदर लखनऊ पहुंच रहे हैं। राजनीतिक सम्पादक प्रशांत मिश्र से भी लखनऊ पहुंचने को कहा गया है। एसोसिएट एडीटर पंडित विष्णु प्रकाश त्रिपाठी भी साथ हो सकते हैं।

तमाम कोशिशों के बावजूद नदीम दैनिक जागरण में नहीं रुक रहे हैं, इतना तय हो गया है। उन्होंने प्रबंधन को बता दिया है कि नवभारत टाइम्स के साथ उन्होंने जो कमिटमेंट किया है, उसे उन्हें पूरा करना ही है। नभाटा प्रबंधन ने लखनऊ के रेजीडेंट एडीटर सुधीर मिश्र और असिस्टेंट एडीटर नदीम को दिल्ली बुला लिया है। सोमवार से यह दोनो लोग दिल्ली बैठना शुरू कर देंगे ताकि अखबार निकालने की आगे की प्रक्रिया को अंजाम तक पहुंचाया जा सके।
 
लेकिन उधर दैनिक जागरण में संकट कम होने के बजाय बढ़ता दिख रहा है। नदीम के बाद किसे ब्यूरो चीफ बनाया जाय, इस पहेली का हल मिलना जितना मुश्किल हो रहा है, उससे बड़ी चुनौती जागरण प्रबंधन के लिए राज्य ब्यूरो को भर-भरा कर गिरने से बचाने की है। फिलाहाल सिर्फ पांच लोगों के सहारे चल रहे राज्य ब्यूरो के दो सदस्यों के बारे में चर्चा है कि नदीम के हटते ही उन्होंने भी अलग-अलग अखबारों में अपने ठिकाने तलाशने शुरू कर दिए हैं। यह भी चर्चा है कि कम से कम एक और अधिकतम दो लोगों को नदीम नभाटा ले जा सकते हैं। उप्र का राज्य ब्यूरो स्थानीय सम्पादक के अधीन काम करता है। कहा जा रहा है कि दिलीप अवस्थी का राज्य ब्यूरो के साथ आज तक संवाद और विश्वास का रिश्ता कायम ही नहीं हो पाया, ऐसे में उनके लिए राज्य ब्यूरो को बचा पाना मुश्किल ही नहीं मुमकिन हो रहा है। स्टेट एडीटर रामेश्वर पाण्डेय की कोशिशें प्रबंधन के कहने पर तो जारी हैं लेकिन कहा जा रहा है कि दिलीप अवस्थी को एक असफल आरई साबित करने का इससे अच्छा मौका उनके लिए और कोई दूसरा नहीं हो सकता, इसलिए उनकी कोशिशें दिखावे के लिए चल रही हैं।
सूत्रों का कहना है कि इन्हीं सब बातों के दृष्टिगत दैनिक जागरण के मालिक संजय गुप्ता ने खुद लखनऊ पहुंचने का निर्णय किया है। वह राज्य ब्यूरो के सदस्यों के साथ अलग-अलग बात कर उनकी दिल की सुनेंगे। उनकी पहली प्राथमिकता राज्य ब्यूरो को बचाने के साथ ही राज्य ब्यूरो के सदस्यों को ब्यूरो चीफ के किसी नाम के लिए राजी करना भी होगा।

उधर, एक अन्य सूचना के मुताबिक दैनिक जागरण लखनऊ में नदीम के बहाने शुरू हुआ संकट परवेज अहमद को राज्य ब्यूरो से लोकल में शिफ्ट करा सकता है। राज्य ब्यूरो के सदस्यों के बागी तेवर देखते हुए प्रबंधन यह कदम उठा सकता है और दिलीप अवस्थी अपनी कुर्सी बचाने को इसके लिए अपनी रजामंदी दे सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि राज्य ब्यूरो के सदस्य संजय गुप्ता से अपनी मुलाकात में परवेज अहमद की राज्य ब्यूरो में नियुक्ति का मुद्दा जोर-शोर से उठा सकते हैं और इस बात पर अड़ सकते हैं कि इतने जूनियर के साथ उन लोगों के लिए काम करना मुश्किल है। कहा जा रहा है कि राज्य ब्यूरो के सदस्यों को फिलहाल मनाने और नदीम के जागरण छोडऩे से पैदा हुए संकट से निपटने के लिए परवेज अहमद को प्रबंधन को लोकल में शिफ्ट करने में कोई ज्यादा एतराज नहीं है।

सूत्रों की माने तो दिलीप अवस्थी राज्य ब्यूरो के तमाम सदस्यों की वरिष्ठता को नजरअंदाज करते हुए तीन हफ़्ते पहले परवेज अहमद को हिन्दुस्तान अखबार से लाकर जागरण के राज्य ब्यूरो में प्रमुख संवाददाता बना दिया। मालिकों से परवेज अहमद के नाम पर मुहर लगवाने से पहले उन्होंने अपने राज्य ब्यूरो के बाकी सदस्यों से भी कोई राय मश्विरा नहीं किया। यहां तक कि स्टेट एडीटर रामेश्वर पांडे को इसकी जानकारी तब हुई जब परवेज की खबर अखबार में छपी। परवेज को समाजवादी पार्टी की बीट देने के लिए स्वदेश कुमार को डाक डेस्क पर भेज दिया गया।
परवेज अहमद की काबिलियत का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि दैनिक जागरण में उनकी पहली खबर जिसे दिलीप अवस्थी ने पहले पेज पर लीड जैसे ट्रीटमेंट के साथ जागरण विशेष बनाकर छपवाई, वह छह महीने पहले सभी अखबारों में प्रेस नोट के शक्ल में छप चुकी थी।

परवेज अहमद दूसरा बड़ा एसाइनमेंट आजम खां और शिवपाल यादव के कार्यक्रम की कवरेज का दिया गया। इस कार्यक्रम में आजम खां ने  अपनी पार्टी के सांसद नरेश अग्रवाल को जमकर खरी खोटी सुनाई लेकिन परवेज अहमद इसे समझ ही नहीं पाए, इस वजह से उसे कापी का हिस्सा नहीं बनाया। शिवपाल यादव ने अफसरों की सोच को नकारात्मक करार दिया लेकिन परवेज शिवपाल का भाषण लिखना ही भूल गए। शिवपाल यादव के अमेरिका न जाने की घोषणा परवेज सुन ही नहीं पाए,यह हिस्सा जागरण ब्यूरो के एक दूसरे सदस्य ने टीवी से देखकर जुड़वाया। इन दोनो प्रकरणों को दिलीप अवस्थी ने दबवा दिया क्योंकि इससे उनके सलेक्शन पर सवाल उठ सकते थे। सूत्रों का कहना है कि राज्य ब्यूरो के सदस्य अब संजय गुप्ता के सामने इस पूरे प्रकरण को रखेंगे।

कानाफूसी कैटगरी की खबरें सुनी सुनाई बातों और चर्चाओं पर आधारित होती हैं. इसलिए इन पर भरोसा करने से पहले तथ्यों की अपने स्तर पर खुद जांच पड़ताल कर लें.

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