भारत सरकार याहू, गूगल, फेसबुक, ट्विटर जैसे बड़े आईटी खिलाड़ियों द्वारा नियमों का पालन करा सकने में पूरी तरह असमर्थ जान पड़ता है. सामाजिक कार्यकर्ता अमिताभ और नूतन ठाकुर द्वारा इलाहाबाद हाई कोर्ट, लखनऊ बेंच में दायर कंटेम्प्ट याचिका में दिये आदेश से ऐसा ही जान पड़ता है.
अमिताभ और नूतन ने सर्विस प्रोवाइडर द्वारा इन्फोर्मेशन टेक्नोलोजी (इंटरमिडीएरी गाइडलाइन्स) नियमावली 2011 का पालन नहीं करने के बारे में दो रिट याचिकाएं की और इनके सम्बन्ध में दो कंटेम्प्ट याचिका भी किये. इसके सम्बन्ध में इलेक्ट्रौनिक और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव जे सत्यनारायण के 17 मई 2013 के आदेश के अनुसार सरकार ने नियमों का पालन कराने के हाई कोर्ट के आदेशों के बारे में 12 जून 2012 को सभी सर्विस प्रोवाइडर को निर्देश भेजे. फिर 02 अगस्त और 29 नवंबर को मंत्री कपिल सिब्बल की अध्यक्षता में हुई बैठक में ये निर्देश दिये गए. मंत्रालय ने
अपने वेबसाईट पर भी हाई कोर्ट के आदेश डाल रखा है.
इन सब प्रयासों के बाद भी सर्विस प्रोवाइडर इस नियमावली के नियम तीन तथा 11 का पालन नहीं कर रहे हैं. नियम तीन में सभी इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर को अपने वेबसाईट पर यह स्पष्ट करना होता है कि उसके उपभोक्ता किस प्रकार की बातें नहीं प्रसारित कर सकते और नियम 11 के अनुसार उन्हें अपने वेबसाईट पर शिकायत अधिकारियों के नाम और उनके संपर्क पते प्रकाशित करना अनिवार्य है.





