आगरा से प्रकाशित द सी एक्सप्रेस में इन दिनों खूब धमाचौकड़ी है। यहां खबर पर नहीं, विज्ञापन पर ध्यान है। रिपोर्टरों को विज्ञापन लाना ही पड़ता है। अगर आप विज्ञापन नहीं ला सकते हैं तो नौकरी भी नहीं कर सकते हैं। विज्ञापन का दबाव बनाने पर डॉ. अमी आधार निडर नौकरी छोड़ चुके हैं। विज्ञापन के चक्कर में मालिक नीरज जैन से उनकी खूब तकरार हुई है। उस समय राजीव दधीच और भानु प्रताप सिंह मौजूद थे। उस समय डॉ. अमी आधार निडर ने कह दिया था कि विज्ञापन नहीं करूंगा, मैं इस्तीफा दूंगा।
जब से डॉ. हर्षदेव फिर से सम्पादक बनकर आए हैं, तब से निडर आफिस नहीं आ रहे हैं। प्रिंट लाइन से उनका नाम भी हटा दिया गया है। मुख्य कारण यही है कि उन पर विज्ञापन का दबाव था। अखबार में विज्ञापन का आलम यह है कि जो नहीं लाता है, उसे खरीखोटी सुननी पड़ती है। यहां तो हर खबर विज्ञापन के पलड़े में तोली जा रही है। विज्ञापन लाने वाला माईबाप है। अमी आधार ने एक उदाहरण प्रस्तुत किया लेकिन अन्य लोग हिमम्त नहीं कर पा रहे हैं। विज्ञापन के दबाव के कारण नए लोग सी एक्सप्रेस में नहीं आ रहे हैं। सी एक्सप्रेस में वेतन दो महीने विलम्ब से मिल रहा है। बाहर से आए लोग खासे परेशान हैं। तनख्वाह के चक्कर में आफिस में कई बार चिक-चिक हुई है। झगड़ा तक हो चुका है। मैनेजमेंट पर इसका कोई असर नहीं है। सबसे कह दिया गया है कि नौकरी करनी है करो, नहीं करनी है तो मत करो। मुश्किल उनके सामने है जो बड़े अखबारों से नौकरी छोड़कर आए हैं।





