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b4m 5thbday : भड़ास की टीम को बधाइयां, वास्तव में धुन के पक्के हैं आप लोग

श्रीयशवंतजी, सादर प्रणाम, भड़ास के पांच साल पूरे होने पर आपको एवं आपकी टीम को बहुत-बहुत बधाइयां। वास्तव में धुन के पक्के हैं आप। आपके व्यक्तित्व से प्रेरणा मिलती है कुछ कर गुजरने की। आपने मीडिया जगत की अंदरुनी खबरों को जिस अंदाज में छापा वह वाकई दबंग होने का प्रमाण देता है। आपने मीडिया जगत के तमाम उन लोगों को भी बखूबी आईना दिखाया जो अपने आगे दूसरों को गौण मानते रहे। ऐसे कई लोगों को जबर्दस्त एवं ठोस प्लेटफार्म मुहैया कराया जो रचनाधर्मिता में आस्था रखते हैं।

श्रीयशवंतजी, सादर प्रणाम, भड़ास के पांच साल पूरे होने पर आपको एवं आपकी टीम को बहुत-बहुत बधाइयां। वास्तव में धुन के पक्के हैं आप। आपके व्यक्तित्व से प्रेरणा मिलती है कुछ कर गुजरने की। आपने मीडिया जगत की अंदरुनी खबरों को जिस अंदाज में छापा वह वाकई दबंग होने का प्रमाण देता है। आपने मीडिया जगत के तमाम उन लोगों को भी बखूबी आईना दिखाया जो अपने आगे दूसरों को गौण मानते रहे। ऐसे कई लोगों को जबर्दस्त एवं ठोस प्लेटफार्म मुहैया कराया जो रचनाधर्मिता में आस्था रखते हैं।

घोटालेबाजों और अधिनायकवाद के समर्थक तथाकथित और मूर्धन्य झंडाबरदारों को आपने जिस निर्भीकता से समाज के सामने पेश किया वह भी काबिले दाद है। आपके प्रयास और प्रयोग को हम मीडिया जगत का एक नया और बेमिसाल आयाम ही नाम देंगे। आपने वह कर दिखाया जिसे वर्तमान मीडिया जगत के बडे़.बड़े सूरमा भी नहीं कर पाए। निश्चित तौर पर भड़ास मीडिया जगत के लिए मील का एक पत्थर है। यह मीडिया जगत के बड़े-बड़े जहाजों और उनके कप्तानों के लिए प्रकाश स्तंभ के रूप में काम कर रहा है। वे आत्मश्लाघा के कारण इसे मानें या न मानें उन्हें विचलन की स्थिति से उबारकर सही राह दिखाने का काम भी कर रहा है भड़ास।

भड़ास का काफिला साल दर साल आगे बढ़ता रहे यही कामना है। भड़ास के तेवर मुझे एक शायर की कुछ पंक्तियों की याद दिलाते हैं जिन्हें यह चरितार्थ कर रहा है।

..खामोश मिजाजी हमें जीने नहीं देगी, इस दौर में जीना है तो कोहराम मचा दो।

भड़ास के तेवर इसी तरह से बने रहें और पत्रकारिता जगत की आंतरिक खबरों को यूं ही वह परोसता रहे ताकि दीपक तले अंधेरा न कायम होने पाए।  यहां एक और मरहूम शायर की कुछ पंक्तियां लिखने का मन कर रहा है।

वो भेड़ व बकरी से भी गुजरे हुए बेकाम, संसार में कुछ मूल्य न उनका जो गुलाम।

यहां गुलाम का आशय मानसिक गुलामी से ग्रसित लोगों से है। वे जो रूपयों की चकाचौंध के भंवर में उलझ जाने के कारण सच को सच कहने का माददा खो चुके हैं। बस हां-हुजूरी को ही परम धरम मान रहे हैं।

लेखक

उमेश शुक्ल

जनसंचार और पत्रकारिता संस्थान
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय
झांसी
मोबाइल नंबर- 9452959936


tag- b4m 5thbday

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