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सुख-दुख...

हरारे के होटल में जब विक्रम राव पर थप्पड़ों और घूसों की बौछार हो रही थी…

एक दिन (शंकर मार्केट) कनाट प्लेस स्थित दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट के कार्यालय से एक फोन आया- ''मिस्टर त्यागी आपको अफ्रीका के एक देश जिम्बाबे जाना है। वहां पर हरारे में विश्व के पत्रकारों का सम्मेलन हो रहा है।'' कपूर साहब भारतीय पत्रकारों के संगठन के महासचिव थे। कपूर साहब ने मुझे बुलाकर उस समारोह में शामिल होने के लिए कुछ दस्तावेज और हमारे पहुंचने के लिए वायुयान का टिकट दे दिया।

एक दिन (शंकर मार्केट) कनाट प्लेस स्थित दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट के कार्यालय से एक फोन आया- ''मिस्टर त्यागी आपको अफ्रीका के एक देश जिम्बाबे जाना है। वहां पर हरारे में विश्व के पत्रकारों का सम्मेलन हो रहा है।'' कपूर साहब भारतीय पत्रकारों के संगठन के महासचिव थे। कपूर साहब ने मुझे बुलाकर उस समारोह में शामिल होने के लिए कुछ दस्तावेज और हमारे पहुंचने के लिए वायुयान का टिकट दे दिया।

उन्होंने मुझे एक हिदायत भी दी जिसमें यह निर्देश दिया गया कि– ''आप देश के पत्रकारों और फोटो जर्नलिस्टों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, याद रहे वहां पर कोई ऐसी घटना ना होने पाये जिससे भारत का सिर नीचा हो। उन्होंने यह भी बताया कि आपके साथ प्रतिनिधिमंडल में लखनऊ से विक्रम राव होंगे, कलकत्ता से कल्याण होंगे और बम्बई से फडनीस साहब होंगे। मुझे आशा है कि आप इन सब को सहयोग देंगे और इन सबका ध्यान भी रखेंगे। विशेष रूप से विक्रम राव का। मुझे उम्मीद है कि आप सब कुछ संभाल लेंगे।''

हरारे जाने से पहले मैं प्रधानमंत्री कार्यालय पहुंचा। प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर के निजी सचिव चतुभुर्ज गौतम यानी गौतमजी मुझे लेकर प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर जी के पास गये। प्रधानमंत्री ने देखते ही हंसकर पूछा- ''का हो बन्डखोर (बन्डखोर मराठी में रिवोल्यशनरी को कहते हैं) तुम इतना बड़का नेता बन गये हो अफ्रीका जा रहे हो''। मैं प्रधानमंत्री को नमस्कार करके पालम हवाई अड्डे के लिए निकल पड़ा। दिल्ली से बम्बई पहुंचा। हवाई अड्डे से निकलकर उस स्थान पर पहुंचा जहां से मुझे हरारे के लिए फ्लाइट पकड़नी थी। मेरा सामान चैक करके अफसरों ने मुझे बोर्डिंग कार्ड दे दिया। जैसे ही मैं वायुयान की ओर जा रहा था तो एक अधिकारी भागता हुआ आया। उसने कहा कि अभी-अभी दिल्ली से फैक्स आया है कि आपने यलो फिवर का टीका नहीं लगवाया। मैंने उन्हें बताया- भाई साहब, मैं तो पहली बार जा रहा हूं। मुझे किसी ने भी नहीं बताया। मैं वहां से सम्मेलन में भाग लेकर जब आ जाऊंगा तो बम्बई एयरपोर्ट पर आकर लगवा लूंगा। अब आप जाइये आपका धन्यवाद। उस अधिकारी ने मेरी प्रार्थना स्वीकार कर ली और मुझे जाने की इजाजत दे दी।

अब मैं हवाई जहाज पर सवार हो चुका था। सीट बैल्ट बांधने की घोषणा के साथ-साथ यह भी बताया गया कि कृपया आप लोग अपनी अपनी घडियों का समय चेंज कर लें। इन्टरनेशनल समय के अनुसार अब इतने बजे हैं। करीब 5-6 घंटे की उड़ान के पश्चात केनिया की राजधानी नैरोबी के इन्टरनेशनल हवाई अड्डे पर उतर गया। यहां से उतर कर हम एक प्रतीक्षालय में पहुंचे। वहां से लगभग 2 घंटे के पश्चात दूसरे हवाई जहाज में बैठे। वहां नैरोबी से उड़कर हम लोग जिम्बाबवे की राजधानी हरारे के हवाई अड्डे पर उतर गये। वहां हमें होटल पहुंचाने के लिए गाड़ियां लगी थी। इन्हीं गाड़ियों से हमें हरारे कान्टीनेन्टल होटल में पहुंचा दिया गया। इसी होटल में कुछ दिन पूर्व निर्गुट राष्ट्रों का सम्मेलन हुआ था जिसमें भाग लेने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी आये थे। मुझे अत्यन्त खुशी हुई कि आज मुझे भी इस सभागार में बोलने का अवसर इस अन्तराष्ट्रीय मंच पर मिलेगा।

हम लोग अपना रजिस्ट्रेशन करा रहे थे तो अन्दर सभागर में हंगामा हो रहा था। कुछ लोग चिल्ला रहे थे मारो-मारो। मैं भाग कर उस स्थान पर गया जहां हंगामा हो रहा था। मैंने जाकर देखा कि विक्रम राव जो भारतीय प्रतिनिधिमंडल में आये थे, उनको कुछ लोगों ने पकड़ रखा है और फिलीपाइन्स का युवक इन पर मुक्कों और थप्पड़ों की बौछार कर रहा है। मैंने उस मारने वाले व्यक्ति का पीछे से कालर पकड़ कर पीछे खींच लिया। विक्रम राव तो छुट गये। मैंने उस युवक से कहा कि तुम पत्रकार हो या गुन्डे। अगर तुम गुण्डे हो तो मैं भी तुम्हें यहीं पर सबक सिखा सकता हूँ। उस व्यक्ति ने कहा यू डोंट नो ही इज वास्टर्ड। ही इज चीटर। ही इज चीटिंग टू द यूनियन। ही इज नोट पेईंग सिगल पैनी। ही कैरीड ए प्रिंटिंग मशीन ऑफ द आई ओ जे। आइ ओ जे (यानी वह अन्तराष्ट्रीय पत्रकार संगठन जिसमें मैं भी भाग लेने यहां आया था।)

मैंने उस युवक से पूछा क्या आप इस संगठन के अध्यक्ष हो या महासचिव? उसने उत्तर दिया- यह सबका यूनियन है। मैंने उससे कहा आप इस मैटर को सम्मेलन में उठाइये। उसने कहा- ही इज शेमलेस। दिस वाज रेजड अर्लियर इन पेरिस कान्फ्रेंस। बट ही इज नाट पेंइग एण्ड ही इज यूजिग दैट मशीन फार हिज पर्सनल परपज। मैंने उससे कहा यह विक्रम राव भारतीय डेलीगेट है। हम लोग चार डेलीगेट हैं। लखनऊ से विक्रम राव बम्बई से फडनीस और कलकत्ता से कल्याण। इसको छोड़िये। मैं इस इश्यू को इस सम्मेलन में उठाउंगा। अगर पैसा दिलाने की बात है तो मैं अपनी सरकार और संगठन से दिलाऊंगा। मामला शांत हुआ। मेरे लिए सबसे अहम बात थी अगर विक्रम राव को वहां कुछ हो जाता तो पूरी दुनिया में भारत के खिलाफ खबर छपती। विक्रम राव की गलती से भारत की बदनामी होती।

इस घटना के पश्चात रजिस्ट्रेशन हुआ. इस रजिस्ट्रेशन में जो फोल्डर मिला उसमें दो निरोध के पैकट भी दिये गये। मैंने आयोजकों के पीआरओ से पूछा- यह निरोध का पैकट क्यों दिये गये हैं। उसका उत्तर था- इस देश में एड्स की बीमारी 70 प्रतिशत लोगों को है। यहां सैक्स फ्री है। अगर आपको सेक्स करना है तो इन कन्डोम का प्रयोग करें। मैंने उसे बताया हमारे देश में ऐसा नहीं होता, आप इसे रख लीजिए। उसने जबर्दस्ती मेरे बैग में दोनों पैकट रख दिये। सम्मेलन शुरू होने से पहले सभागार में जिम्बाबवे के राष्ट्रपति रोबर्ट मुगावे से परिचय कराया गया। मैंने भी उनसे हाथ मिलाया। मैं किसी राष्ट्रपति से हाथ मिलाकर अपने को गौरवान्वित महसूस कर रहा था।

सम्मेलन शुरू हुआ. राष्ट्रपति मुगांवे ने उद्घाटन किया। वह उद्घाटन करके चले गये। आईओजे के अध्यक्ष ने अपना अध्यक्षीय भाषण दिया। उन्होंने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा- मेरे से पहले पदाधिकारीगण यहां से इस संगठन से करोड़ों डालर लेकर गये हैं। परन्तु मैं आज तक यहां से एक भी डालर अपने खर्चे के लिए नहीं लिया। न तो एयर टिकट न होटल में ठहरने का। न टैक्सी का किराया। मैं अपनी जेब का पैसा खर्च करता हूं। दूसरी ओर चिकोस्लवाकिया सरकार प्राग से इस युनियन के कार्यालय को हटाना चाहती है, सरकार का कहना कि आप इस कार्यालय को यहां से फ्रान्स (पेरिस) ले जाओ। हमारे देश में आजकल काफी डिस्टर्वेन्स चल रहा है। किसी भी समय कुछ भी हो सकता है।

थोड़ी देर के बाद ही ब्रेक हो गया। फिर सभा शुरू हुई। टी ब्रेक के समय मुझे अजीब नजारा देखने को मिला। अधिकतर लोग काली चाय पी रहे थे। बहुत कम लोगों ने चीनी का क्यूब और सूखे दूध का पाउडर लिया। परन्तु हमारे देश में बिना दुध और चीनी चाय पीने का रिवाज नहीं है।

उसी दिन लन्च के पश्चात मुझे भी भारतीय प्रतिनिधि के रूप में बोलने का अवसर मिला। मैंने अपने साथी फडनीस से पूछा क्या फडनीस साहब मैं हिन्दी में बोल सकता हूँ। उन्होंने कहा नहीं। आप इस टेबल पर जो माइक लगा है। उसमें देखिये इसमें अरेविक- फ्रैंच अंग्रेजी-स्पेनिस के चैनल हैं। आपको जितनी भी अंग्रेजी आती है आप अंग्रेजी में ही बोलें। मैंने फिर वहीं बोलते हुए सुबह के समय हुई विक्रम राव की पिटाई का मामला उठाया। मैंने उनसे पूछा- मिस्टर चेयरमैन, इन दी मॉर्निंग सेशन यू वर कर्मेंटिंग दैट मेनी आफिस वियरर्स कैरिड कोरड्स आफ डालर फ्रोम दी आर्गेनाइजेशन। वट नैवर आई गाट सिंगल डालर। बट सर इन दी मॉर्निंग सम पर्सनस वेयर इन्सल्टिंग टू विक्रम राव एन इन्डियन डेलीगेट। दे वेयर क्लेमिंग दी विक्रम राव इज ए चीटर विकाज ही इज नाट पेईंग द एमाउंट ऑफ दैट मशीन। विक्रम राव यूजिंग दैट मशीन फार हिज डोमिस्टिक परपज। इट इज अन फेयर। सर डू यू गेव प्रमोशन टू इन्सलट विक्रम राव.. इट इज नाट फेयर। सर आई एम गिविंग गारन्टी टू रिर्टन दिस मशीन आर मनी आन विहाफ माई गर्वमेंट, आन विहाफ माई कन्ट्री एण्ड माई ऑर्गेनाइजेशन… बट सर फस्ट यू ब्रिंग दैट करोड़स ऑफ डालर विच वाज लूटेड वाई ओलड रीजीम।

इतना सुनते ही सभा गृह में तालियां बजी और लोगों ने मेजें थपथपायी। अध्यक्ष और मंच पर बैठे लोग भी हंस रहे थे। सभा समाप्ति के पश्चात मैं जिधर से भी निकलता था तो युवक पत्रकार और महिला पत्रकार मेरी ओर उंगली करके कहते थे, ही इज मिस्टर त्यागी, ही इज इन्डियन। मैं अपने को अफ्रीका के उस देश में इन्डियन कहलाए जाने पर गौरवानित महसूस कर रहा था। फिर कुछ युवतियां और नवयुवक पत्रकारों ने मेरे साथ फोटो खिंचवाए। जब भी समय मिलता तभी सभी युवक युवतियां पत्रकार अपने कपड़े उतार कर चड्ढी ब्रेजरी पहने धूप में लेट जाती थीं। मैंने ऐसे दृश्य पहले कभी नहीं देखा था। मैं आगे बढ़कर स्वीमिंग पूल की ओर गया तो वहां पड़ी आराम कुर्सियों पर उसी दशा में युवक युवतियां पड़े और धूप में बैठे थे। मैं पश्चिम की इस सभ्यता को देखकर दंग रह गया। गौरतलब बात यह है कि जितने भी युवक और युवतियां इस अधिवेशन में शामिल हुए थे उनमें भारतीय प्रतिनिधिमंडल के सिवाय सभी या तो इन्फोमेशन अफसर थे या डाइरेक्टर थे। जिन्होंने भी मुझे अपने कार्ड दिये सभी में यही लिखा था। मालूम हुआ यह सभी कम्यूनिस्ट देशों के कथित पत्रकार हैं और केजीवी से सम्बन्धित हैं क्योंकि चाहे राजशाही हो चाहे इस्लामिक राष्ट्रों के पत्रकार हो और चाहे कम्यूनिस्ट समर्थक, वहां पर सरकार के विरूद्ध कुछ नहीं लिखा जाता।

हरारे स्थित उन सभी राष्ट्रों के राजदूत उन पत्रकारों से मिलने होटल में आ रहे थे। मैंने भी भारतीय राजदूत से मिलने का समय मांगा। हरारे स्थित भारतीय राजदूत ने मिलने में असमर्थता व्यक्त कर दी। उसका कहना था कि मंत्री जी भारत से आये हैं, मैं उनके कार्यक्रमों में व्यस्त हूं। मैंने राजदूत महोदय से कहा- ''श्रीमान जी अपने मंत्री जी से कहें कि मैं हरारे कान्टीनेन्टल होटल कमरा नं. फलां में ठहरा हूं, वह मुझसे सम्पर्क कर लें।'' रात में लगभग 1.30 पर मंत्री महोदय का फोन आया। उन्होंने फोन पर बताया, मैं दिग्विजय सिंह बोल रहा हूं, हमारे राजदूत ने बताया है कि आप 2-3 दिन से हरारे में हैं। गुरु, सुबह आइये, मैं इस जगह ठहरा हुआ हूं। मैंने उनसे कहा- मैं भी यहां की सरकार का मेहमान हूं। आप हमारे पास 10 बजे तक आ जाइये क्योंकि 11 बजे मुझे हवाई अड्डे पहुंचना है अगर सुबह मुलाकात नहीं होगी तो मैं दिल्ली पहुंच कर बलिया जाऊंगा। आपको पता है कि वहां पर पार्टी का सम्मेलन है। उन्होंने मुझे बताया कि मैं भी यहां से वहीं पर जाऊंगा। चलो वहीं पर मुलाकात होगी। मैंने उन्हें बताया कि आपके कमरे से कुछ महिलाओं की आवाज आ रही है। अगर यह महिलाएं यहीं की है तो तुरन्त अपने कमरे से निकाल दें क्योंकि यहां पर एक भयंकर बीमारी फैली हुई है जिसे एड्स कहते हैं। मुझे हमारे सम्मेलन के आयोजकों ने बताया है कृपया करके इसका ध्यान रखें।

उन्होंने मुझे धन्यवाद दिया। फिर दूसरे दिन मैं प्रोग्राम के अनुसार हवाई अड्डे आ गया और बम्बई के रास्ते दिल्ली पहुंच गया। परन्तु मैं सोचता रहा कि अपने को पत्रकारों का राष्ट्रीय नेता बताने वाले विक्रम राव की छवि विदेश में भी लूट मार की है। यलो फीवर की शिकायत विक्रम राव ने कराई थी क्योंकि वह अपने किसी और आदमी को भेजना चाहते थे। इस बात का पता मुझे वापस आने पर चला। दिल्ली आने पर जब विक्रम राव से मुलाकात हुई तो वह सफाई देने लगे। मैंने उनसे कहा- आप अपने देश में जो चाहे करो, परन्तु विदेश में तो भारतीय छवि को न बिगाड़ें। विक्रम राव निःशब्द खड़े थे।

लेखक विजेंदर त्यागी देश के जाने-माने फोटोजर्नलिस्ट हैं और खरी-खरी बोलने-कहने-लिखने के लिए चर्चित हैं. पिछले चालीस साल से बतौर फोटोजर्नलिस्ट विभिन्न मीडिया संगठनों के लिए कार्यरत रहे. कई वर्षों तक फ्रीलांस फोटोजर्नलिस्ट के रूप में काम किया और आजकल ये अपनी कंपनी ब्लैक स्टार के बैनर तले फोटोजर्नलिस्ट के रूप में सक्रिय हैं. 'The legend and the legacy : Jawaharlal Nehru to Rahul Gandhi' नामक किताब के लेखक भी हैं विजेंदर त्यागी. यूपी के सहारनपुर जिले में पैदा हुए विजेंदर मेरठ विवि से बीए करने के बाद फोटोजर्नलिस्ट के रूप में सक्रिय हुए. विजेंदर त्यागी को यह गौरव हासिल है कि उन्होंने जवाहरलाल नेहरू से लेकर अभी के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तस्वीरें खींची हैं. वे एशिया वीक, इंडिया एब्राड, ट्रिब्यून, पायनियर, डेक्कन हेराल्ड, संडे ब्लिट्ज, करेंट वीकली, अमर उजाला, हिंदू जैसे अखबारों पत्र पत्रिकाओं के लिए काम कर चुके हैं.


बेबाक विजेंदर त्यागी के लिखे कुछ रोचक किस्से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें- भड़ास पर विजेंदर त्यागी

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