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फिक्सिंग के बहाने सहारा क्रिकेट मैदान से ही बाहर!

आईपीएल में स्पॉट फिक्सिंग के सामने आने के बाद सहारा ने अपनी चालबाजियां दिखानी शुरू कर दी हैं। पहले से ही निवेशकों का पैसा हड़पने एयर आईपीएल में अपनी टीम के लिए गारंटी मनी का भुगतान न करने के लिए चक्कर में फंसी सहारा ने मौका मिलते ही खुद को आईपीएल के साथ भारतीय क्रिकेट के मैदान से भी अलग कर लिया। इस मौके को सहारा ने अपनी ‘वास्तविक’ हैसियत को देखते हुए हाथ से न जाने का फैसला किया है।

आईपीएल में स्पॉट फिक्सिंग के सामने आने के बाद सहारा ने अपनी चालबाजियां दिखानी शुरू कर दी हैं। पहले से ही निवेशकों का पैसा हड़पने एयर आईपीएल में अपनी टीम के लिए गारंटी मनी का भुगतान न करने के लिए चक्कर में फंसी सहारा ने मौका मिलते ही खुद को आईपीएल के साथ भारतीय क्रिकेट के मैदान से भी अलग कर लिया। इस मौके को सहारा ने अपनी ‘वास्तविक’ हैसियत को देखते हुए हाथ से न जाने का फैसला किया है।

खबर आ रही है कि सुब्रत राय सहारा की कंपनी ने भारतीय क्रिकेट टीम का प्रायोजक बनने से भी इनकार कर दिया है। यही नहीं, आईपीएल में स्पॉट फिक्सिंग का मामला सामने आने के बाद सहारा ने आईपीएल से अपनी टीम पुणे वारियर्स सहारा को अलग कर लिया है। लेकिन इस मामले में जो बात आम लोगों को नहीं पता, वह यह है कि सहारा ने यह सब खेल हित या देशहित को देखते हुए नहीं, बल्कि अपनी पतली हालत को देखते हुए लिया है। सहाराश्री के नजदीकी लोगों ने इशारों ही इशारों में बताया कि सहाराश्री क्रिकेट और क्रिकेट के धंधे से दूर हटने पर विचार कर रहे थे। इसकी वजह भारतीय क्रिकेट टीम के प्रायोजक के तौर पर भुगतान की जाने वाली मोती रकम के अलावा आईपीएल में अपनी टीम के लिए पैसों का भुगतान न कर पाना भी है।

दरअसल, बीसीसीआई ने पुणे वारियर्स फ्रेंचाइजी के लिए तयशुदा राशि न देने के लिए सहारा पर दवाब डाल रही थी। इसके अलावा पूरी फ्रैंचाइजी फीस न चुकाने की वजह से बीसीसीआई ने सहारा की बैंक गारंटी को भुनाने का फैसला किया था। सहारा ने पुणे फ्रैंचाइजी 10 सालों के लिए 1702 करोड़ रुपये में खरीदी थी। सहारा ने फ्रैंचाइजी फीस का 20 फीसदी ही बीसीसीआई को चुकाया था। सहारा ने बाकी रकम 19 मई तक चुकाने का वादा किया था। वहीं, आर्थिक दुश्वारियों से जूझ रहे सहारा समूह ने अब टीम इंडिया को स्‍पांसर करने से भी मना कर दिया है।

लाखों निवेशकों के हक़ को मारने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में फटकार सुनने के साथ ही सेबी की तरफ से कई कंपनियों के खाते सीज करने की वजह से इस समय सहारा की हालत पतली है। सहारा हाल-फ़िलहाल अपने अतिरिक्त खर्चों में कटौती करने के साथ ही निवेशकों का भी पैसा लौटाने की कोशिश कर रही है, लेकिन अपनी आईपीएल टीम द्वारा टूर्नामेंट में अपेक्षित सफलता न हासिल करना भी सहारा के लिए नित नई मुसीबतें बढ़ा रहा था। एक तरफ से सहारा क्रिकेटरों के साथ अन्य स्टाफ पर पानी की तरह पैसा बहा रहा था, तो दूसरी तरफ टीम भी सफल नहीं हो पा रही थी। इन सब बातों के अलावा बीसीसीआई के हालिया कदम ने भी सहारा की कमर तोड़ दी थी, जिसके बाद सहारा ने आईपीएल के साथ भारतीय क्रिकेट टीम से भी नाता तोड़ते हुए क्रिकेट के मैदान से बोरिया-बिस्तर बटोरने में भलाई समझी।

महुआ न्यूज के लिए श्रवण शुक्ल की रिपोर्ट.

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