राजस्थान पत्रिका के जोधपुर संस्करण में भाषा और समाचारों की गुणवत्ता में पतन का सिलसिला थम ही नहीं रहा। सभी पुराने लोगों को पत्रिका प्रबंधन ने बाहर का रास्ता दिखा दिया। अब जो लोग बचे हैं, उन में से ज्यादातर नए और अनुभवहीन हैं। जिस व्यक्ति ने फीचर लिखने और जस्ट जोधपुर जैसे फीचर पेज निकालने से ज्यादा कुछ नहीं किया, उसे कंपनी ने चीफ रिपोर्टर बना रखा है। उसे रिलीव करने वाले की काबिलियत सिर्फ यह है कि वह संस्करण के संपादक का खासमखास है।
इसका परिणाम यह होता है कि अख़बार में हर दिन कुछ न कुछ भारी गलती छप ही जाती है। हद तो यह हो गई कि 13 मई के अखबार में खेल पृष्ठ पर पत्रिका ने जिन्दा खिलाडियों से मृत्यु प्रमाण पत्र मांग लिए। खबर में लिखा है "सभी संभावित खिलाडी अपने-अपने मृत्यु प्रमाण पत्र साथ लाये। देखिये भाषा के नाम पर फिजूल गाल बजने वाले गुलाब कोठारी के समाचार पत्र की हकीकत।

नीतेश गहलोत





