बदायूं में वर्ष 2010 के बलात्कार के एक प्रकरण में अदालत ने एसओ के साथ एक पत्रकार और छायाकार को पहचान उजागर करने का दोषी पाते हुये पुलिस को मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। इस खबर को हिंदुस्तान ने प्रथम पेज पर प्रमुखता से छापा है, लेकिन अन्य अखबार इस प्रकरण को दबाने का प्रयास कर रहे हैं, बाकी अखबारों ने इस घटना को 2010 में भी दबाने का प्रयास किया था, जिससे आज जिले भर में लोग हिंदुस्तान की प्रशंसा कर रहे हैं।
बदायूं के थाना अलापुर में 27 दिसंबर 2010 को पीडित महिला ने मुकदमा दर्ज कराया था, जिसमें पूर्व ब्लाक प्रमुख पतंजलि भारद्वाज के मकान के पीछे बलात्कार करने का आरोप लगाया गया था। एडीजे-6 ने पूरे प्रकरण को सुनने के बाद आरोपी वरुण भारद्वाज को को दोषी मानते हुये उम्र कैद की सज़ा के साथ एक लाख के जुर्माने की भी सज़ा सुनाई, जिसमें सत्तर हजार रुपए पीडिता को दिये जाने का आदेश दिया गया है।
इसी प्रकरण में तत्कालीन एसओ प्रदीप शुक्ला और एक पत्रकार विनीत शर्मा और छायाकार अजय मिश्रा को दोषी पाया गया है। कोर्ट के सामने यह बात सिद्ध हो गई कि एसओ की मदद से इन लोगों ने पीडिता का इंटरव्यू लिया और आरोपी को लाभ पहुंचाने की नीयत से फोटो के साथ नाम-पते सहित छापा। पत्रकार ने खुद को वायस आफ लखनऊ का जिला प्रभारी, नार्थ इंडिया टाइम्स का रिपोर्टर और मासिक पत्रिका हिन्द मोर्चा का अधिशासी संपादक बताया था। अदालत ने इन लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने का आदेश सुनाया है, जिससे पत्रकारों में हड़कंप मच गया है।
उधर अपराधियों में एडीजे-6 श्री एसएन त्रिपाठी का खौफ कायम हो गया है, वह हत्या की सज़ा देने का रिकार्ड बना चुके हैं, जिससे वह आम आदमी के हीरो बन गए हैं। अदालतों से लोग ऐसे ही त्वरित न्याय की अपेक्षा करते हैं और श्री त्रिपाठी आम आदमी की अपेक्षा पर खरे उतर रहे हैं।







