उत्तर प्रदेश में मायावती की सरकार का उतार-चढ़ाव भरा कार्यकाल एक बदलाव की ओर बढ़ सकता है. समाजवादी पार्टी सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभर सकती है, जबकि बीएसपी सीटों के मामले में दूसरे स्थान पर खिसक जाएगी अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में मायावती को जबरदस्त झटका लग सकता है. स्टार न्यूज़-नील्सन ओपिनियन पोल के सर्वेक्षण में यह बात भी सामने आई है कि राज्य में कांग्रेस पार्टी को पुनर्जीवन मिल सकता है, जबकि अपनी खोई हुई जमीन पाने को बेकरार बीजेपी चौथे स्थान पर आ सकती है.
राज्य में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों की हलचल के दौरान 16 से 30 नवंबर के बीच ताज़ा राजनीतिक स्थिति पर राज्य के 202 विधानसभा क्षेत्रों में 36,712 लोगों से उनकी राय सर्वेक्षण में आई है. चार सौ तीन सीटों वाले विधानसभा में मायावती की पार्टी बीएसपी, जिसने पिछले विधानसभा चुनाव में 206 सीटों पर अपना कब्जा जमाया था, लेकिन ताजा राजनीतिक परिदृश्य में उन्हें महज 120 सीटों पर संतोष करना होगा. अगर इस सर्वे में कांग्रेस और आरएलडी के गठबंधन को शामिल कर लिया जाए तो बीएसपी को तीन और सीटों का नुकसान हो सकता है, यानी उसकी सीटें घटकर 117 पर पहुंच जाएगी.
वहीँ दूसरी और सर्वेक्षण में सपा को सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरने की संभावना जताई गई है. सपा जो 2007 के विधानसभा चुनावों में सौ का भी आंकड़ा नहीं पा कर सकी थी इस बार उसके 135 सीटें जीतने की संभावना जताई गई है. वर्ष 2007 के चुनावों में सपा को 97 सीटें मिली थीं. कांग्रेस के लिए माहौल साज़गार है और 2007 में महज़ 22 सीटें जीतने वाली कांग्रेस का आंकड़ा 50 को पार कर 68 पर पहुंच जाएगा और इस तरह उसे कुल मिलाकर 46 सीटों का फायदा होता दिख रहा है.
अगर कांग्रेस और आरएलडी गठबंधन को एक साथ करके सीटों का आकलन किया जाए तो दोनों पार्टियों को 2007 के विधानसभा में जहां 32 सीटें मिली थी, लेकिन इस बार के चुनाव में 85 सीटें जीतने की संभावना जताई जा रही है और इस तरह उस गठबंधन को 53 सीटों का फायदा होता दिख रहा है. सबसे बुरा हाल बीजेपी का है, हालांकि उसे सीटों का नुकसान नहीं हो रहा है. वर्ष 2007 में 51 सीटों पर संतोष करने वाली बीजेपी इस बार 14 सीटों के फायदे के साथ 65 सीटें जीत सकती हैं, लेकिन पांच साल पहले सत्ता गंवानी वाली बीजेपी के लिए स्थिति बहुत ही नाजु़क है.
कांग्रेस का आरएलडी से हाथ मिलाना दोनों पार्टियों के लिए फ़ायदेमंद साबित हो रहा है. दोनों पार्टियाँ 85 जीत सकती है और इस तरह आरएलडी का आंकड़ा पिछले चुनाव के मुकाबले 10 से 15 हो जाएगा, जबकि कांग्रेस का आंकड़ा 22 से बढ़कर 70 हो जाएगा. दिलचस्प बात यह है कि इस बार के चुनाव में सपा की सीटों में तो इजाफा होने की संभावना तो है लेकिन इसके पक्ष में वोटिंग प्रतिशत में कोई बढोतरी नहीं हो पायेगी जो समान ही रह सकती है. सपा को 2007 के चुनाव में 25.43 फीसदी मत मिले थो जो इस बार घटकर 25 फीसदी हो जाएगी.
हालांकि, बीएसपी की वोटिंग प्रतिशत में खासी कमी आ जाएगी. बीएसपी को पिछले चुनाव में 30.43 प्रतिशत वोट मिले थे जो इस बार घट कर 24 प्रतिशत वोट मिलने की उम्मीद ही है. सर्वेक्षण के अनुसार कांग्रेस-आरएलडी गठबंधन को इस बार 19 प्रतिशत वोट मिलने की आशंका है जोकि किसी पार्टी के हक में इस कदर वोटों का बढ़ना एक रिकार्ड होगा. बीजेपी के हक में भी वोटिंग प्रतिशत बढ़ेगा, लेकिन सीटों के मामले में वह कांग्रेस गठबंधन से पिछड़ जाएगी. 2007 में करीब 17 फीसदी वोट पाने वाली बीजेपी को इस बार 19 प्रतिशत वोट मिलेगा, जो कांग्रेस और आरएलडी के बराबर होगा.
वर्ष 2007 में बीएसपी को 206, सपा को 97, बीजेपी को 51, कांग्रेस को 22, आरएलडी को 10 और अन्य के खाते में आठ सीटें गई थीं, लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग होगी यानी बीएसपी को 117, सपा को 132, बीजेपी को 65, कांग्रेस को 70, आरएलडी को 15 और अन्य के खाते में आठ ही सीटें जाएंगी.





