गुवाहाटी। सीएमजे यूनिवर्सिटी ने अपने ऊपर लगे फर्जी डिग्री बांटने के आरोपों को पूरी तरह से खारिज किया है। आज यहां गुवाहाटी प्रेस क्लब में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में यूनिवर्सिटी के प्रवक्ता तथा कानूनी सलाहकार एसपी शर्मा ने कहा कि सीएमजे पर लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह से निराधार और मनगढ़ंत है। इन आरोपों का वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है। क्योंकि छानबीन जारी है और मामला कोर्ट में विचाराधीन है।
संवाददाताओं द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब में अधिवक्ता शर्मा ने कहा कि मेघालय की सरकार ने एक कानून बना कर सीएमजे की स्थापना की मंजूरी दी थी साथ यूजीसी से भी मान्यता प्राप्त है और यूजीसी ने आज तक कोई आपत्ति नहीं जताई है। उन्होंने कहा कि इस संस्थान ने छात्रों की सेवा करने के सिवाय कोई गलती नहीं की है। मगर सुनी सुनाई बातों के आधार पर राज्यपाल ने आपत्ति जताते हुए राज्य सरकार को पत्र लिखा है। सीआईडी मामले की जांच कर रही है और उन्हें विश्वास है कि जांच से दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
श्री शर्मा ने संवाददाताओं के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि संस्थान ने मेघालय के मुख्यमंत्री को एक खुला पत्र लिख कर वर्तमान स्थितियों से अवगत कराया है और संस्थान की साख पर आंच पहुंचाए जाने के उद्देश्य से चल रहे दुष्प्रचार को रोकने के लिए हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल की शिकायत के बाद पुलिस संस्थान के लोगों के साथ अपराधी की तरह पेश आ रही है और संस्थान को सील कर विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
श्री शर्मा ने पीएचडी की फर्जी डिग्री दिए जाने के आरोपों पर कहा कि संस्थान की ओर से किसी को भी फर्जी डिग्री नहीं दिया गया है। पीएचडी के लिए यूजीसी के निर्देशों के तहत विद्यार्थियों को पंजीकृत किया गया है और आज तक यूजीसी ने इस संबंध में कोई आपत्ति नहीं जताई है। उन्होंने सूचना का अधिकार कानून के तहत यूजीसी से सीएमजे के ऊपर मिली जानकारी की कापी भी संवाददाताओं को सौंपा।
गुवाहाटी से नीरज झा की रिपोर्ट.





